उल्लास में डूबा था पूरा जिला, बांटे गए थे आजादी के पर्चे
फैजाबाद। 15 अगस्त 1947, देश की आजादी के दिन पूरा जिला उल्लास में डूबा था। अंग्रेज अफसरों को भारतीय भगा रहे थे। चारों ओर गांधी की टोपी व तिरंगे के साथ जश्न मनाया जा रहा था। तराने व देशभक्ति के गीत गाए जा रहे थे। शहर के कलक्ट्रेट व सर्किट हाउस पर तिरंगा झंडा फहरा दिया गया था। संचार संसाधनों की कमी के चलते आजादी की सूचना सभी तक पहुंचाने के लिए वॉलेंटियर लगाए गए थे। यह गांवों में पहुंच कर प्रमुख लोगों को देश के आजाद होने की सूचना दे रहे थे।
वरिष्ठ पत्रकार शीतला सिंह तब वह 16 वर्ष के थे। वह बताते हैं कि उनको पूरी तरह से याद कि आजादी की सुबह पूरे गांव में जबरदस्त उल्लास था। खासतौर उस समय की युवा पीढ़ी काफी उत्साहित थी। वह बताते हैं कि लोगों को आजादी के बारे में बताने के लिए पर्चे बांटे जा रहे थे। पर्चे पर लिखा था कि... आज हथकड़ी टूट गई है, गुलामी की जंजीर टूट गई है, उठो देश का कल्याण करो, नवयुग का निर्माण करो। वह बताते हैं कि जब वह आजादी का जश्न मना रहे थे तो एक बुजुर्ग ने उनको डांटते हुए कहा था कि यह क्या कर रहे हो और जिन लोगों के लिए कर रहे हो वह अच्छे नहीं हैं। दूसरी ओर पढ़े-लिखे लोग इस बात को लेकर असमंजस में थे कि मौजूदा भारतीय लोग देश को चला पाएंगे या नहीं। अब तक 101 सावन देख चुके हाजी सईदुर्रहमान खान बताते हैं कि आजादी के बरस उनकी उम्र 30 वर्ष की थी। वह द्वितीय विश्व युद्ध होने के बाद वापस देश लौट आए थे। जबलपुर के सैनिक अड्डे पर इस्तीफा देने के बाद अपने गांव पहुंचे थे। चारों ओर खुशी का माहौल था। जश्न में पूरा गांव डूबा था। प्रतिबंधित रही गांधी की टोपी व खद्दर लोगों ने धारण किया था। कुछ लोगों के पास झंडे भी थे। पूरा दिन रात उत्सव जैसे माहौल रहा। घरों में दीप जलाए गए थे। वह बताते हैं कि इस बात को लेकर अवश्य असमंजस था कि यहां रहना है या पाकिस्तान जाना है। नरेंद्र विहार कॉलोनी देवकाली निवासी 93 वर्ष के हो चुके नरेंद्रपति मिश्र बताते हैं कि आजादी के दिन गजब का उल्लास था। गांधी टोपी व तिरंगा लेकर जश्न मना रहे थे। कागज पर खुद से लोगों ने तीन रंगों से रंग कर गांव-गांव प्रभात फेरी निकाली थी। गांधी व नेहरू का चारों ओर जय जयकार हो रहा था। होली-दिवाली से बढ़कर उल्लास मनाया गया था। वह बताते हैं कि कुछ जगहों पर आजादी के दिन बताशे भी बांटे गए थे। तत्कालीन फैजाबाद जनपद व मौजूदा समय में अंबेडकरनगर के रामनगर के प्राइमरी स्कूल में प्रधानाचार्य रामहरक के नेतृत्व में प्रथम स्वतंत्रता दिवस मनाया गया था। तारुन नसरतपुर के मजरा सुरतपुर निवासी व परिषदीय शिक्षा से सेवानिवृत्त 95 वर्षीय जालपा प्रसाद पाठक बताते हैं कि आजादी के नाम पर चेहरे पर अलग ही भाव आ गया था। बताया कि 18 वर्ष की उम्र में ही प्राइमरी की नौकरी मिल गयी थी। आजादी के बाद पहला स्वतंत्रता दिवस विद्यालय में झंडारोहण, गीत-संगीत और वीर गाथाओं को बच्चों को बता कर मनाया था। जिसमें विद्यालय के सहयोगी अध्यापक भलभद्र तिवारी ,राम सकल सिंह भी शामिल थे। वर्तमान समय कविता लिखना व योग को जीवन का हिस्सा बनाया है।