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घाटों से दूर हो रही सरयू की धारा, घटा प्रवाह

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घाटों से दूर हो रही सरयू, घटा प्रवाह
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अयोध्या। कड़ाके की ठंड में सरयू की धारा भी घाटों से दूर चली गई। अयोध्या का जल स्तर निरंतर घटता जा रहा है। जिससे प्रतिदिन दर्शन-पूजन से पहले स्नान करने वाले श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

संत तुलसीदास घाट पर तो करीब 500 मीटर की दूरी तय करने पर सरयू की धारा का स्पर्श संभव है। अभी चार माह पहले ही सरयू में बाढ़ आई थी, इतना जल्दी प्रवाह सिमटना वैज्ञानिक भी अच्छा नहीं मानते। वो भूजल संकट और बढ़ने की आशंका जता रहे हैं।
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पावन सलिला सरयू मोक्षदायिनी कही जाती है। अयोध्या के उत्तर दिशा में बहने वाली सरयू का अत्यंत महत्व है। सरयू जहां आस्था का केंद्र हैं तो वहीं मोक्ष का द्वार भी खोलने का काम करती है। आज भी सरयू को पवित्र नदियों में माना जाता है।

भीषण ठंड के बीच सरयू की धारा तेजी से सिमटने लगी है, जिससे प्रतिदिन सरयू आने वाले श्रद्धालुओं को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि लक्ष्मणघाट की ओर से सरयू की धारा प्रवाहित हो रही है, जो घाटों तक पहुंच रही है।

लेकिन संततुलसीदास घाट की ओर सरयू की धारा रूठ कर घाटों से नित प्रतिदिन दूरी बनाती जा रही है। धर्मनगरी में प्रतिदिन हजारों लेाग सरयू स्नान व दर्शन-पूजन को आते हैं तो बड़ी संख्या में अंत्येष्टि को भी लेाग आते हैं।

ऐसे में धारा घाटों के समीप न होने से उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। केंद्रीय जल आयोग के अभियंता विनय कुशवाहा के मुताबिक सरयू प्रतिदिन 10 सेमी घट रही है। एक सप्ताह के भीतर सरयू 70 सेमी घट चुकी है।
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आयोग के मुताबिक सरयू का शून्य लेबल 85 मीटर है, गत दिवस सरयू का जलस्तर 88.260 मीटर रिकॉर्ड किया गया। पर्यावरण विद अवध विश्वविद्यालय के प्रो. जसवंत सिंह ने बताया कि सर्दी के मौसम में पहाड़ी नदियों का पानी कम होता है, इसका एक कारण नहरों का भी डायवर्ट होना है। इन सबके बावजूद जलस्तर तेजी से खिसकना चिंता का विषय है, खेती किसानी भी प्रभावित होगी।
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