तेरह पेशियों से नहीं भेजी आख्या, चालान खुद किया बताया एआरटीओ को
फैजाबाद। कोर्ट में दी गई वाहन रिलीज की अर्जी पर तेरह पेशियों से आख्या नहीं भेजी गई। वाहन का चालान पुलिस ने किया लेकिन कोर्ट को भेजी गई आख्या में बताया गया कि चालान एआरटीओ ने किया है।
अदालत ने कोतवाल अयोध्या के इस कृत्य को लापरवाही और अदालत के आदेश की अवमानना मानते हुए विभागीय कार्रवाई का आदेश दिया है। यह आदेश सीजेएम राजेश पाराशर की कोर्ट ने एसएसपी को दिया है।
एसएसपी को कार्रवाई करके 19 सितंबर तक कोर्ट को भी अवगत कराना है। अयोध्या कोतवाली के सड़क दुर्घटना में हुई मौत के एक मामले में कोर्ट में वाहन स्वामी ने वाहन को अवमुक्त करने के लिए अर्जी दी।
इसमें तेरह पेशियों से पुलिस ने वाहन के तकनीकी परीक्षण की आख्या नहीं भेजी। इसी तरह एक दूसरे मामले में वाहन को रिलीज करने के लिए श्यामनरायन की ओर से दी गई अर्जी पर भी सही आख्या नहीं दी गई।
चालान पुलिस ने किया लेकिन इस वाहन का चालान एआरटीओ द्वारा करने की आख्या अदालत को भेजी गई। इस आख्या पर कोर्ट ने प्रश्नगत वाहन को वाहन स्वामी के पक्ष में अवमुक्त करने का आदेश दिया तो उसे कोतवाल ने अवमुक्त नहीं किया।
अपराध संख्या 117 सन 2015 में लोक संपत्ति से क्षति का निवारण अधिनियम की धारा 4/21 व 379, 411 में आरोप-पत्र भेजा, जबकि इस अधिनियम में यह धारा है ही नहीं।
त्रुटिपूर्ण आदेश प्रेषित किए जाने पर कोर्ट ने विवेचक व प्रभारी कोतवाल अयोध्या को नोटिस भेज विवेचक और कोतवाल को तलब किया लेकिन न तो विवेचक और न ही कोतवाल ने कोर्ट में उपस्थित होने की जहमत उठाई न कोई आख्या ही इस संबंध में भेजी।
इसे गंभीरता से लेते हुए कोर्ट ने कोतवाल और विवेचक की इस लापरवाही पर तीनों मामलों में विभागीय कार्रवाई करके कोर्ट को 19 सितंबर तक अवगत कराने का आदेश दिया है।