अयोध्या फिल्म महोत्सव का आगाज
फैजाबाद। हमें इतिहास के पुनर्लेखन की जरूरत है। मुगलों व अंग्रेजों के बारे में पढ़ाने से अच्छा होता कि हम क्रांतिकारियों व अपने महापुरुषों के बारे में बताते। ताजमहल व लालकिला की प्रशंसा करने की बजाय हमें गर्व की अनुभूति तब होती जब हम बताते इसे भारतीय मजदूरों ने बनाया है।
ये बातें डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय व अवाम के सिनेमा के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित 11वें अयोध्या फिल्म महोत्सव का उद्घाटन करते हुए इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ. अजय प्रताप सिंह ने बुधवार को कहीं।
डॉ. अजय प्रताप सिंह ने कहा कि, आज भी भारत रत्न उन्हें मिलता है जो बोरोप्लस का प्रचार करते हैं, देश के लिए जान न्यौछावर करने वालों को ये सम्मान नहीं मिलता। काकोरी एक्शन डे पर होने वाले फिल्मोत्सव कि आज छटा देखने वाली थी।
महोत्सव में शामिल हुए तात्यां टोपे के वंशज विनायकराव टोपे, भगत सिंह के सहयोगी गयाप्रसाद कटियार के प्रपौत्र क्रांति कुमार, अमर शहीद जमुना प्रसाद त्रिपाठी के प्रपौत्र इंजीनियर राज त्रिपाठी, इतिहासकार आलोक बाजपेई, लेखक व फैजाबाद के आरटीओ सुभाष कुशवाहा को जब सम्मानित किया गया तो पूरा हॉल तालियों से गूंज उठा।
अवध विवि के प्रो. आरके विश्वकर्मा, डॉ. अनिल यादव, डॉ. संग्राम सिंह, डॉ. फारुख जमाल, शाह आलम व ओमप्रकाश सिंह ने क्रांतिकारियों के वंशजों को सम्मानित किया। शहीद अशफाक उल्ला शोध संस्थान के निदेशक सूर्यकांत पांडेय ने कार्यक्रम का संचालन किया।