जिले में नलकूप विभाग को जैसे लकवा मार गया है। विभिन्न कारणों से 70 से भी अधिक नलकूप बंद चल रहे हैं। अब जबकि किसानों को खरीफ की फसलों के लिए पानी की सख्त जरूरत है तो नलकूपों के पानी न देने से सब्जियां व दूसरी फसलें उगा रहे करीब तीन सौ किसान परेशान हैं।
विभागीय सूत्रों के अनुसार जिले में 614 नलकूप हैं। इनके रखरखाव के लिए शासन से प्रति वर्ष रुपये मिलते हैं। विभाग छोटे दोषों में बंद पड़े नलकूपों को तो किसी तरह सही कराकर चलवा दे रहा है, लेकिन बड़े दोषों (मोटर या ट्रांसफार्मर फुंकने पर) में बंद नलकूपों को चलाने में विभाग को महीने भर से भी ज्यादा समय लग रहा है।
किसान के सामने सबसे बड़ी दिक्कत है कि बंद चल रहे नलकूपों को चलाए जाने के लिए उसे एक पटल के बजाय अलग-अलग पटलों पर चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। बिजली दोष या फिर मोटर दोष को दूर कराने के लिए किसान इन्हीं दो पाटों में घुन की तरह पिसता रहता है। वह विभागों की बेरुखी से परेशान है।
सूत्रों के अनुसार पंप दोष, मोटर दोष, नाली दोष, स्टार्टर दोष, केबल दोष, ट्रांसफार्मर व लाइन दोष में बंद चल रहे नलकूपों की संख्या 70 से भी अधिक है। पूरा-मसौधा ब्लॉकों में 7, मिल्कीपुर-अमानीगंज में 15, सोहावल में 7 और बीकापुर के आंशिक हिस्से में ही 8 नलकूपों के खराब होने की जानकारी है।
अयोध्या मेला ड्यूटी में लगे नलकूप विभाग के अधिशासी अभियंता मुरलीधर का कहना है कि स्टार्टर, पंप, केबल, नाली व मोटर दोष में खराब नलकूपों को जल्द ठीक कराकर चलाने की व्यवस्था हो रही है।