मंदिरों में होने वाला झूलनोत्सव विशेष आकर्षण का बना केंद्र
अयोध्या। अयोध्या के ऐतिहासिक श्रावण झूला मेला की शुरुआत हो चुकी है। सात अगस्त को रक्षाबंधन तक चलने वाले इस मेले का आनंद उठाने के लिए श्रद्धालुओं ने अयोध्या में डेरा डालना शुरू कर दिया है।
मेले के प्रमुख पर्व 28 जुलाई नागपंचमी, 30 जुलाई गोस्वामी तुलसीदास जयंती, 31 जुलाई सावन का तीसरा सोमवार, तीन अगस्त पुत्रदा एकादशी व सात अगस्त पूर्णिमा व रक्षाबंधन है। इसे लेकर प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं।
अयोध्या के तीन मेलों में प्रमुख सावन झूला मेले में देशभर से लाखों श्रद्धालु आते हैं। मेले के दौरान नगरी के मंदिरों में आयोजित होने वाला झूलनोत्सव श्रद्धालुओं के विशेष आकर्षण का केंद्र होता है।
पखवारे भर तक चलने वाले मेले में जुटने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सुविधा व सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस-प्रशासन स्तर पर व्यापक इंतजाम किए गए हैं। मेले में व्यवस्थाओं को लेकर जुटे संबंधित विभागों ने तैयारियां पूरी होने का दावा किया है।
साफ-सफाई को लेकर सफाई कर्मियों को उतार तो दिया गया है लेकिन गली-कूचों से लेकर सड़कों तक पर पर्याप्त साफ-सफाई नहीं दिख रही है। वहीं, अंडरग्राउंड विद्युत केबल डालने के नाम पर उखाड़ी गईं सड़कें ठीक नहीं हो सकी हैं।
इस बारे में मेलाधिकारी व एडीएम विंध्यवासिनी राय ने कहा कि, पूरे मेला क्षेत्र पर निगरानी रखी जा रही है। कहीं भी कोई अव्यवस्था होगी तो उसे तत्काल दूर किया जाएगा।
झूलन में सज-धज के युगल सरकार बैठे हैं...
अयोध्या। रामनगरी में सावन मेला शुरू होने के साथ ही मठ-मंदिरों में झूलनोत्सव परवान चढ़ने लगा है। बुधवार रात से ही मंदिरों में झूले पर चल विग्रहों की वैदिक मंत्रोच्चार के बीच स्थापना के बाद गीत-संगीत व नृत्य की स्वर लहरियां बिखरने लगी हैं। आराध्य के दर्शन-पूजन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी है।
मठ-मंदिरों में झूलनोत्सव के तहत पारंपरिक, शास्त्रीय गीत-संगीत व नृत्य के कार्यक्रम भी परवान चढ़ने लगे हैं। शाम होते ही मंदिरों के जगमोहन से तबले की थाप व हारमोनियम की धुनें श्रद्धालुओं को बरबस अपनी ओर खींचने लगतीं हैं। देर रात तक चलने वाले कार्यक्रमों व आराध्य के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने लगी है।
रसिक संप्रदाय के झुनकी घाट स्थित सियाराम किला, सद्गुरु सदन गोलाघाट, श्रीरामबल्लभाकुंज, जानकी घाट बड़ा स्थान, कनक भवन में संत-धर्माचार्य व श्रद्धालु ‘झूलन में आज सज-धज के युगल सरकार बैठे हैं, ‘राम रसिया सरयू किनारे कदम जूरि, भइया राम रसिया हिंडोरा लागे ला बा’ आदि भजन व कजरी गीतों से सरयू तट गुंजायमान हो रहा है।
इसी तरह रंग महल, विअहुति भवन, हनुमानगढ़ी, जानकी महल ट्रस्ट, श्रीमणिराम दास की छावनी, तुलसीदास की छावनी, अशर्फी भवन, श्रीकालेराम मंदिर, हनुमत निवास, बावन मंदिर, बड़ा स्थान, बड़ा भक्तमाल, हनुमत सदन आदि मंदिरों के जगमोहन में सांस्कृतिक कार्यक्रम शुरू हो गए हैं। मंदिरों में झूलनोत्सव के दर्शन के लिए शाम ढलते ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगती है।