अयोध्या। डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विवि की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन एक बार फिर शक के दायरे में है। कुल साढ़े तीन मिनट में एक उत्तर पुस्तिका का मूल्यांकन कर दिया जा रहा है।
हालत यह है कि निर्धारित मानक के विपरीत हर परीक्षक को 100 उत्तर पुस्तिकाएं थमा दी जा रही हैं। पिछले वर्ष इन्हीं गलतियों की वजह से मूल्यांकन कार्य में बड़े पैमाने पर धांधली सामने आई थी, विवि प्रशासन को पुनर्मूल्यांकन कराना पड़ा था।
इसके बावजूद इस वर्ष कोई विशेष सतर्कता नहीं बरती जा रही है। हालांकि विवि प्रशासन का दावा है कि मई के अंत तक सभी परीक्षा परिणाम घोषित हो जाएंगे।
अवध विवि में मूल्यांकन कार्य 25 मार्च से शुरू हो गया है। पिछले वर्ष की तर्ज पर इस वर्ष भी उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए कोडिंग व्यवस्था लागू है।
इतना अवश्य है कि कोडिंग व्यवस्था के लिए इस बार संस्था को जिम्मेदारी सौंपी गई है। विवि के पास करीब 30 लाख उत्तर पुस्तिकाएं हैं। इनमें तकरीबन 20 लाख उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन हो चुका है।
अब बीए के कुछ सब्जेक्टिव विषय व परास्नातक विषयों के मूल्यांकन कार्य शेष हैं। स्नातक प्रथम वर्ष की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन कंप्यूटर के माध्यम से हुआ है।
इनकी संख्या नौ लाख के आसपास है। विवि प्रशासन का दावा है कि मूल्यांकन कार्य चार कमरों में प्रतिदिन चार सौ परीक्षक सीसीटीवी की निगरानी में कर रहे हैं लेकिन इस बार भी उत्तर पुस्तिकाओं की कोडिंग के बाद 100-100 के बंडल बनाए जा रहे हैं।
मूल्यांकन का निर्धारित समय सुबह 10 से लेकर शाम पांच बजे तक है। इसमें भी एक घंटा परीक्षक लंच करने जाते हैं। अब सिर्फ परीक्षकों के पास 100 उत्तर पुस्तिकाएं जांचने के लिए लगभग 360 मिनट बचते हैं।
इनमें औसत रूप से परीक्षक प्रति उत्तर पुस्तिका को सिर्फ साढ़े तीन मिनट ही दे पाता है जबकि एवार्ड ब्लैंक ही चार प्रतियों में भरा जाना है। सिर्फ एवार्ड ब्लैंक भरने में कम से कम एक मिनट का समय चाहिए।
ऐसे में उत्तर पुस्तिकाएं की मूल्यांकन प्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। विवि प्रशासन ने पिछली बार भी यही गलती की थी जिसका परिणाम सबके सामने रहा।
कोडिंग के बाद 100-100 उत्तर पुस्तिकाओं के बंडल बनाए जा रहे हैं। मूल्यांकन पूरी तरह से निगरानी में चल रहा है। कहीं से कोई गड़बड़ी होने की सूचना पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी।
उमानाथ, परीक्षा नियंत्रक, अवध विवि