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पर्यावरण जीवन की एक विधा: आचार्य मनोज दीक्षित

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पर्यावरण जीवन का एक अंग : दीक्षित
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फैजाबाद। आज सबसे दुखद यह है कि हमें जगह-जगह पर्यावरण संरक्षण हेतु कार्यक्रम आयोजित करने पड़ रहे हैं। पर्यावरण तो जीवन का एक अंग है। सही शिक्षा हो तो पर्यावरण संरक्षण स्वत: हो जाएगा। इसलिए शिक्षा पद्धति में भी कहीं न कहीं सुधार की जरूरत है। शीघ्र ही विश्वविद्यालय में औषधीय पौधों एवं नक्षत्र वाटिका का रोपण किया जाएगा।

यह बातें अवध विश्वविद्यालय के कुलपित आचार्य मनोज दीक्षित ने कही। वे अवध विश्वविद्यालय के संत कबीर सभागार में आयोजित विद्वत गोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। पंचमुखी महादेव मंदिर गुप्तारघाट के महंत मिथिलेश नंदिनी शरण ने कहा कि हमें अपने गैर जरूरी आवश्यकताओं को भी सीमित करने की आवश्यकता है।
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तभी हमारा और राष्ट्र का सही विकास होगा। डॉ. जेपी सिंह ने पर्यावरण संरक्षण की महती आवश्यकता पर बल दिया। कहा कि अधिक से अधिक पौधरोपण किया जाना चाहिए। कार्यक्रम के संयोजक सवेरा परिवार के आचार्य शिवेंद्र ने पर्यावरण संरक्षण पर जोर दिया। अरविंद सोसायटी की डॉ. मीनू दूबे ने कहा कि संस्कृति के रक्षण से ही प्रकृति का भी पोषण संभव है।
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संचालन साकेत महाविद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. परेश पांडेय ने किया। विद्वत गोष्ठी में साकेत महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य डॉ. प्रदीप खरे, राजीव त्रिपाठी, महंत दिलीप दास त्यागी, संजीव तिवारी, डॉ. चक्रवर्ती सिंह, डॉ. प्रज्ञा मिश्रा, गीता शुक्ला सहित अन्य मौजूद रहे।
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