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सावन झूला मेला आज से, तैयारियां आधी-अधूरी

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डेडलाइन खत्म, गंदगी व कूड़े करकट के लगे ढेर
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अयोध्या। धर्मनगरी का प्रसिद्ध सावन झूला मेला बुधवार को मणिपर्वत मेले के साथ आरंभ हो रहा है। लगभग पखवारे भर तक चलने वाले मेले को लेकर नगरी में श्रद्धालुओं का जमावड़ा शुरू हो गया है। डीएम की मेला में व्यवस्थाओं को पूरा करने की डेड लाइन खत्म हो चुकी है, प्रशासन का मेले की व्यवस्थाएं पूरी होने का दावा भी है लेकिन वास्तविकता इससे इतर है।

मेले में व्यवस्थाओं के नाम पर तैयारियां आधी-अधूरी ही हैं। डीएम की मेले से पूर्व व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने की चेतावनी भी बेअसर दिख रही है। मुख्य मार्गों पर ही गंदगी व कूड़े करकट के ढेर लगे हुए हैं, सड़कों पर अभी भी गड्ढे हैं।
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रामनगरी के सावन झूला मेला में नगर के मंदिरों में होने वाला झूलनोत्सव श्रद्धालुओं के विशेष आकर्षण का केंद्र होता है। बुधवार को मणिपर्वत पर झूलनोत्सव के साथ मेले का आगाज होगा। 7 अगस्त तक चलने वाले मेले में लाखों श्रद्धालुओं को प्रशासन की ओर से बेहतर सुविधाओं का दावा रहा है लेकिन मेले की पूर्व संध्या तक तैयारियों आधी-अधूरी ही रहीं।

यह स्थिति तब है जब लगभग माह भर से मेले की तैयारियां विभागों द्वारा की जा रही है। मेला क्षेत्र में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए सबसे ज्यादा परेशानी अंडरग्राउंड विद्युत केबल डालने के लिए खोदे गए गड्ढे देंगे। इसको लेकर डीएम ने संबंधित विभाग को चेतावनी देते हुए डेडलाइन जारी की थी जिसके पूरा होने के बाद भी गड्ढे नहीं भरे जा सके हैं।

वर्तमान में मेला व्यवस्था की तैयारियों का जो हाल कुछ ऐसा है कि राम की पैड़ी व आसपास के क्षेत्रों में गंदगी पसरी हुई है। सावन मेले में सर्वाधिक भीड़ श्रद्धालुओं की राम की पैड़ी पर स्थित प्रसिद्ध नागेश्वरनाथ मंदिर के साथ ही हनुमानगढ़ी मंदिर में होती है।

इन दोनों मंदिरों तक पहुंचने वाले मार्गों पर जगह-जगह कूड़े-कचरे व गंदगी फैली हुई है। मणिपर्वत से शुरू होने वाले मेले में मणिपर्वत से रानोपली जाने वाले मार्ग पर बड़े-बड़े गड्ढे, अशर्फी भवन से सब्जीमंडी, नजरबाग आदि मार्गों पर गड्ढे पड़े है।

चरण पादुका से तपस्वी जी छावनी मंदिर तक मार्ग खराब है व सीवर का पानी बह रहा है। मेला क्षेत्र में तुलसीनगर, ऋणमोचन घाट, महाराजा इंटर कालेज, कटरा से राजघाट मोड़ पर, बिड़ला धर्मशाला के सामने, गोकुल भवन गेट के सामने, दुराही कुआं के पास आदि स्थानों पर लगे दो दर्जन हैंडपंप अभी भी खराब पड़े हैं।

मणिपर्वत पर चल विग्रह करते हैं झूला विहार
श्रावण शुक्ल तृतीया तिथि पर मणिपर्वत पर धर्मनगरी के सभी मंदिरों के चल विग्रहों के झूला विहार की परंपरा है। प्रसिद्ध कनक भवन मंदिर से चांदी की डोली में विग्रह भगवान की यात्रा सर्वाधिक आकर्षण का केंद्र होती है।

यहां से लौटते ही मंदिरों में झूले पड़ जाते हैं और इसी के साथ मंदिरों में झूलनोत्सव शुरू हो जाते हैं। पखवारे भर तक चलने वाले झूलनोत्सव कार्यक्रमों में शामिल हो श्रद्धालु अपने आराध्य का दर्शन-पूजन करते हैं।
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अतिक्रमण पर दी गई चेतावनी
मंगलवार को मेला क्षेत्र में मार्गों से अतिक्रमण हटाने और दुकानों पर कूड़ादान रखने के संबंध में लाउडस्पीकर से प्रसारण कर डीएम की सख्त चेतावनी दी गई। कहा गया कि मेले में मार्गों पर अतिक्रमण पाए जाने और दुकानों के सामने कूड़ादान के बजाए गंदगी मिलने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी, हालांकि चेतावनी का असर नहीं दिखा।
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