अयोध्या को संवारने के कार्यों की दूर हुईं बाधाएं
अयोध्या। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल रामनगरी के विकास को लेकर 133 करोड़ के प्रस्तावित कार्यों पर महीनों से खड़ी हुई बाधाएं बुधवार को शासन की पहल पर दूर होती दिख रही हैं। अपर प्रमुख सचिव पर्यटन व सूचना अवनीश कुमार अवस्थी ने पर्यटन व कार्यदायी संस्था के साथ बैठक कर देर शाम अड़चनों की समीक्षा के बाद तत्काल तेजी से काम शुरू करने के निर्देश दिए।
अब 6.83 करोड़ की लागत से पटरियों की ऐतिहासिकता बयां करने वाले कोबोल पत्थर को लगाने का काम बृहस्पतिवार से हनुमानगढ़ी से शुरू होगा। 16.44 करोड़ की लटकी मल्टीनेशन पार्किंग काम भी नई जगह चयनित भूमि पर डिजाइन फाइनल कर दी गई है। सेना की ओर से पाटेश्वरी देवी मंदिर के कार्य पर लगाई गई रोक के बाद उस धन का प्रयोग अन्य जगह करने की अनुमति दे दी गई है।
अयोध्या को चमकाने से लेकर मंदिरों तक श्रद्धालुओं को तमाम सुविधाएं देने के लिए कुल 13 परियोजनाओं पर 133 करोड़ की धनराशि आवंटित होने के बाद भी करीब 44 करोड़ के कार्यों में कहीं तकनीकी दिक्कतें बाधा बन गई थीं, तो कहीं भूमि व स्थानीय लोगों के विरोध से काम आगे नहीं बढ़ पा रहा था।
रामनगरी के विकास के बड़े कार्यों में कोबल पत्थर लगाने समेत अन्य काम शुरू होते ही लोगों ने रोक दिया था। वहीं, 16.44 करोड़ से मल्टीनेशनल पार्किंग की भूमि भी बदलने के बाद काम ठप था। 7.59 करोड़ से रामकथा गैलरी व क्वीन हो प्रोजेक्ट में भी बाकी पड़ा रामकथा पार्क से रामकथा संग्रहालय तक उपरिगामी सेतु की जमीन में अड़ंगा आ गया था।
पाटेश्वरी देवी मंदिर के विकास पर भी सेना की आपत्ति से काम लंबे समय से रुका है। कुछ तो अधर में लटक गए हैं, कुछ कार्य जमीन फाइनल न होने से रुके हुए हैं। इनमें से करीब 62 करोड़ के काम यूपी राजकीय निर्माण निगम को करने हैं, जबकि 22 करोड़ कों काम पीडब्लूडी समेत पावर कॉर्पोरेशन के जिम्मे हैं।
49 करोड़ का काम सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग उप्र द्वारा किया जा रहा है। 62 करोड़ के जो कार्य चल रहे हैं उनमें कार्यदायी संस्था हर तरह से तैयार थी, फिर भी से कुछ कार्यों पर किसी न किसी वजह से ब्रेक लगा हुआ था, जिसे लेकर बुधवार को पर्यटन भवन में अपर प्रमुख सचिव पर्यटन व सूचना अवनीश कुमार अवस्थी ने बैठक की।
कार्यदायी संस्था के परियोजना प्रबंधक प्रमोद यादव का कहना है कि बैठक में अधूरे पड़े कार्यों में आई अड़चनों को लेकर समीक्षा हुई। अपर प्रमुख सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिए कि भारत सरकार ने रामनगरी के विकास के लिए करोड़ों की धनराशि आवंटित की है, इसमें किसी तरह की देरी क्षम्य नहीं होगी। जहां भी काम रुके हैं, उसकी बाधाएं तत्काल दूर करते हुए अविलंब काम शुरू कर दिए जाएं।
इसमें स्थानी प्रशासन पूरी मदद करेगा। शासन स्तर से समीक्षा होगी, हर हाल में मार्च समाप्त होने तक ज्यादातर काम पूरे कर लिए जाएं। कोबोल पत्थर लगाने का काम लक्ष्मणघाट से जैसे ही शुरू किया गया स्थानीय लोगों ने विरोध जताकर काम रोक दिया। लक्ष्मणघाट के पार्षद आलोक मिश्र ने कहा कि अच्छी खासी सड़क को कोबोल पत्थर लगाकर बर्बाद करने की योजना है।
स्थानीय नागरिकों अनीस, पवन गुप्ता, पंकज तिवारी, अतुल मिश्र, रामजी मिश्र, जगदीश गुप्त, संत शरण त्यागी आदि ने कहा कि क्षेत्र में अभी सीवर लाइन का कनेक्शन नहीं किया गया है, कनेक्शन के दौरान सड़कों की खोदाई होगी, ऐसे में कोबल पत्थर लगाने की क्या उपयोगिता है। पहले कनेक्शन हो जाए फिर निर्माण कार्य होना चाहिए।
जलनिगम के एक्सईन सुनील कुमार ने बताया कि जहां-जहां सीवर लाइन पड़ी है कनेक्शन का कार्य किया जा रहा है शीघ्र ही लक्ष्मणघाट क्षेत्र में भी हो जाएगा। रामनगरी के प्रमुख स्थलों पर स्ट्रीट कोबोल पत्थर लगाने का काम होना है। प्रमुख मठ-मंदिरों के आसपास भी ये पत्थर लगाए जाने हैं।
चौक अयोध्या रोड से हनुमानगढ़ी, राजद्वार, दशरथ महल, वेद मंदिर, कटरा मोहल्ला, मतगजेंद्र से पोस्टऑफिस तक, कनकभवन, दशरथमहल से विभीषण कुुंड तक, रामकोट, निर्मोचन चौराहा से गोलाघाट होते हुए लक्ष्मणघाट क्षेत्र में तथा तुलसीउद्यान से राम की पैड़ी तक कोबल पत्थर लगाए जाने हैं। गांधी आश्रम से लेकर नागेश्वरनाथ मंदिर तक भी कोबोल पत्थर लगाए जाने हैं लेकिन यहां भी पत्थर लगाने का काम रुका है।
जिसकी वजह से दर्जनों स्थानों पर पत्थर टूट गए हैं, मेनहोल के भी पत्थर गायब हैं, दुर्घटना की संभावना बनी रहती है। यहां राम की पैड़ी की रिमाडलिंग का कार्य चल रहा है जिस वजह से यहां सिंचाई विभाग ने काम रोक रखा है। राम की पैड़ी के पंप हाउस की क्षमता बढ़ाई जा रही है, जिसको लेकर सिंचाई विभाग ने कार्यदाई संस्थान से अभी कार्य नहीं करने को कहा है।
नगर विधायक वेद प्रकाश गुप्ता ने कहा कि अयोध्या का विकास मुख्यमंत्री की प्राथमिकता में हैं। अयोध्या को संवारने के लिए शासन ने 133 करोड़ की योजनाएं स्वीकृत की हैं। इन पर काम चल रहा है, यदि कहीं भी काम सुचारु होने में प्रशासन की तरफ से लापरवाही बरती जा रही है, तो उसकी जांच कराकर एक्शन लिया जाएगा। नुकसान का जुर्माना भी वसूला जाएगा।