अयोध्या। रामकथा एवं रामसंस्कृति को जन-जन तक पहुंचाने के लिए सरकार ने अब स्कूल कॉलेजों में रामकथा का प्रशिक्षण दिए जाने की योजना तैयार की है। रामलीलाओं के प्रशिक्षण के साथ रामचरित मानस को कंठस्थ कराए जाने तथा व्यास परंपरा का अकादमिक रूप से प्रशिक्षण दिए जाने के लिए विशेष कार्ययोजना बनाए जाने के निर्देश दिए गए हैं। स्कूल-कॉलेजों में अब रामलीला को सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी हिस्सा बनाया जाएगा। इसकी जिम्मेदारी अयोध्या शोध संस्थान को सौंपी गई है।
रामलीला के शोध, सर्वेक्षण व प्रदर्शन को लेकर गत दिनों हुई संस्कृति विभाग की बैठक में कई योजनाओं पर मुहर लगी है। विद्यार्थियों में रामलीला के प्रति रुझान उत्पन्न करने के लिए मंचन के साथ ही प्रतियोगिताएं भी आयोजित कराई जाएंगी।
अयोध्या शोध संस्थान के निदेशक वाईपी सिंह कहते हैं कि रामलीला की प्रसिद्धि रामचरित मानस के गायन के माध्यम से हुई है। इस परंपरा को नई पीढ़ी में विकसित करने के लिए विशेष योजना की आवश्यकता है। भारत में करीब 22 भाषाओं में रामकथा का अनुवाद हुआ है, तथा 100 तरह की रामलीलाएं प्रचलित हैं। जबकि विश्व के कई देशों में रामकथा प्रचलित है। सरकार ने रामकथा को जन-जन से जोड़ने की वृहद कार्ययोजना तैयार की है।
रामलीला मंडलियों के लिए सहायता योजना
50 वर्ष अथवा उससे अधिक प्राचीन रामलीला मंडलियों के लिए सहायता योजना संचालित किए जाने की भी योजना है। इसके तहत रामलीला दलों के उन्नयन के लिए वेशभूषा, परदे, वाद्ययंत्रों आदि हेतु एकमुश्त रूप में कुछ धनराशि अनुदान स्वरूप रामलीला मंडलियों को प्रदान की जाएगी। जिला स्तर पर रामलीला मैदान को चिन्हित कर उन्हें भव्य रूप प्रदान किया जाएगा। जिसमें अयोध्या मंच, लंका मंच जैसे कुछ छोटे-छोटे मंच आवश्यकतानुसार तैयार किए जाएंगे।
तैयार की जाएगी रामलीला सर्किट
प्रदेश की मैदानी रामलीलाओं के रामलीला सर्किट पर भी प्रभावी कार्य किए जाने की योजना बन रही है। इसके लिए रामलीला सर्किट तैयार की जाएगी। यही नहीं विदेश की रामलीलाओं के संरक्षण, प्रोत्साहन, दस्तावेजीकरण हेतु उत्तर पूर्व एशिया, यूरोप, रूस तथा गिरिमिटिया रामलीलाओं के लिए विशेष कार्ययोजनाएं तैयार की जा रही है। विश्व के कई देशों और स्थानों के नाम राम से संबंधित हैं इन स्थानों पर शोध कार्य करते हुए इनका संकलन भी तैयार किया जाएगा।