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राममंदिर के एक घनमीटर क्षेत्र में प्रयुक्त हो रहा 2400 किलो फिल्ड मटेरियल

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अयोध्या। रामजन्मभूमि परिसर में बनने वाले राममंदिर सदियों तक सुरक्षित रहे इसको लेकर ट्रस्ट पूरी गंभीरता से काम कर रह है। देश के नामी-गिरामी इंजीनियरों की टीम राममंदिर निर्माण कार्य का निर्देशन कर रही है।
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अभी राममंदिर की नींव भराई का काम चल रहा है। राममंदिर की नींव के लिए खोदे गए 40 फिट गड्ढे को भरने के लिए लेयर डाली जा रही है। नींव की लेयर रोलर कंपैक्टेड कंक्रीट (आरसीसी) प्रणाली से डाली जा रही है।
एक घनमीटर क्षेत्र में कुल 2400 किलो फिल्ड मटेरियल का प्रयोग किया जा रहा है, ताकि नींव की मजबूती में कोई कोर-कसर न रह जाए।
श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने नींव भरने के लिए प्रयुक्त की जा रही तकनीक व फिल्ड मटेरियल की जानकारी देते हुए बताया कि आरसीसी प्रणाली से मंदिर की नींव की लेयर डाली जा रही है।
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जो कम से कम चार से पांच सौ साल तक सुरक्षित रहेगी। बताया कि अब तक एक लाख 20 हजार स्कवायर फीट में आरसीसी प्रणाली से लेयर बिछाई जा चुकी है। एक घनमीटर क्षेत्र में कुल 2400 किलोग्राम फिल्ड मटेरियल का प्रयोग किया जा रहा है।
जिसमें सीमेंट की मात्रा सबसे कम मात्र 2.5 प्रतिशत व कंकरीट की मात्रा सर्वाधिक 1300 किलोग्राम है। एक फिट मोटी लेयर बिछाकर उसे रोलर के जरिए कंपैक्ट किया जा रहा है, इसे ही आरसीसी प्रणाली कहते हैं।
इस प्रणाली से बन रही मंदिर की नींव प्राकृतिक आपदाओं से कई सौ वर्षों तक सुरक्षित रहेगी। ऐसा भरोसा निर्माण कार्य में लगे इंजीनियरों व तकनीकि विशेषज्ञों ने दिलाया है।
चंपत राय ने बताया कि फिल्ड मटेरियल में 60 किलोग्राम सीमेंट, 20 मिलीमीटर की पत्थर गिट्टी 769 किलोग्राम, 10 मिलीमीटर की पत्थर गिट्टी 512 किलोग्राम प्रयुक्त की जा रही है।
इसके साथ ही 854 किलोग्राम पत्थर पाउडर व थर्मल पावर स्टेशन से प्राप्त पत्थर कोयला राख 90 किलोग्राम सहित 115 लीटर पानी के मिश्रण से 2408 किलोग्राम इंजीनियर फिल्ड मटेरियल (ईफीएम) तैयार की जा रही है।
जो एक घनमीटर क्षेत्र में लेयर बिछाने में प्रयुक्त होती है। कहा कि हमारा ध्यान राममंदिर की सदियों तक मजबूती पर है, जल्दबाजी में कोई काम नहीं होगा।
ट्रस्ट के सदस्यों व रामनगरी के संतों को मंदिर निर्माण की तकनीक, प्रगति से लगातार अवगत कराया जा रहा है, संतों को निर्माण कार्य से रू-ब-रू भी कराया जा रहा है, सभी संतुष्ट हैं।
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