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जिला महिला अस्पताल में आपरेशन ठप होने के हालात

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जिला महिला अस्पताल के सीएमएस ने दी पद छोड़ने की चेतावनी
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फैजाबाद। जिला महिला अस्पताल में सिजेरियन ऑपरेशन ठप के हालात हैं। अस्पताल में बेहोशी के डॉक्टरों (एनेस्थीसिया) का अकाल हो गया है। अस्पताल के सीएमएस डॉ. श्रीकांत शुक्ला ने निदेशक से लेकर सभी उच्चाधिकारियों को समस्या से अवगत कराते हुए निदान न होने की दशा में पद छोड़ने की चेतावनी दी है। साथ ही ऐसे हालात में अस्पताल चला पाने में असमर्थता भी जताई है।
जिला महिला अस्पताल में डॉक्टरों की कमी तो पहले से ही थी, लेकिन इन दिनों सिस्टम की तमाम नाकामियों की वजह से समस्या दोगुना हो गई है। जिले की सीएचसी पर महिला चिकित्सकों की मौजूदगी के बावजूद भी बमुश्किल नार्मल प्रसव भर की सुविधा है। सिजेरियन ऑपरेशन संसाधन न होने का रोना रोते हुए केस जिला महिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। यहां संसाधन पर्याप्त हैं तो डॉक्टरों का अकाल है। स्त्री रोग विशेषज्ञ सात स्वीकृत पद के सापेक्ष मौजूदा समय में तीन कार्यरत हैं। इससे भी थोड़ी गनीमत है। लेकिन इन दिनों बेहोशी के डॉक्टरों का अकाल होने से समस्या दोगुनी हो गई है।
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सीएमओ द्वारा यहां तीन बेहोशी के डॉक्टरों को संबद्ध किया गया था। जिसमें डॉ. विजय सिंह को सीएचसी मवई से, टीबी क्लीनिक में तैनात डॉ. शील त्रिपाठी व डॉ. एम कुरैशी को अंबेडकरनगर से। इसके बाद ऑनलाइन बिडिंग मॉडल के तहत एक स्थाई एनेस्थेसिस्ट के रूप में डॉ. रिद्धिमा श्रीवास्तव को यहां तैनात किया गया था। जिससे किसी तरह काम चल रहा था और प्रतिदिन करीब पांच-छह ऑपरेशन हो जाते थे। लेकिन इन दिनों स्थिति विपरीत हो गई है। आलम यह है कि मौजूदा समय में डॉ. विजय सिंह एक सप्ताह से बिना किसी सूचना के अनुपस्थित चल रहे हैं। जिसके लिए सीएमएस ने उच्चाधिकारियों से पत्राचार भी किया है। डॉ. एम कुरैशी बमुश्किल सप्ताह में दो-तीन दिन ही पहुंचते हैं। उसमें भी लखनऊ से यात्रा करके यहां पहुंचने में उन्हें विलंब हो जाता है और उस दिन मुश्किल से दो सीजर ही हो पाता है। डॉ. शील त्रिपाठी की संबद्धता सीएमओ डॉ. एके गुप्ता ने बीते माह ही निरस्त कर दी है। एकमात्र स्थाई एनेस्थेसिस्ट डॉ. रिद्धिमा भी मैटरनिटी अवकाश पर चली गई हैं। ऐसे एकमात्र बेहोशी के चिकित्सक सीएमएस डॉ. श्रीकांत शुक्ला स्वयं हैं। जिनके जिम्मे प्रशासनिक कार्य का भार अधिक होने से सीजर कर पाना मुश्किल काम है। यदि कोई इमरजेंसी मामला आया तो कोई भी अनहोनी प्रसूता के साथ हो सकती है। इन्हीं दुश्वारियों को इंगित करते हुए सीएमएस ने उच्चाधिकारियों को अवगत कराते हुए सीएमएस का पद छोड़ने की चेतावनी दी है।
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सीएमएस का पद त्याग कर करेंगे एनेस्थेसिस्ट का कार्य : डॉ. शुक्ला
सीएमएस डॉ. श्रीकांत शुक्ला ने बताया कि ग्रामीण इलाके के भी अधिकांश सिजेेरियन के मामले में यहां आते हैं। इस वजह से कार्यभार अधिक है लेकिन बेहोशी के चिकित्सकों की भारी कमी है। ऐसे में अस्पताल चला पाना कठिन प्रतीत हो रहा है। यदि शीघ्र ही एनेस्थेसिस्ट की व्यवस्था नहीं होगी तो सीएमएस का पद त्यागकर काम करेंगे। इस मामले से सभी अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है।
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