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अयोध्या में विश्ववर्ती श्रीराम मानवता भवन बनाने की वकालत

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अयोध्या में विश्ववर्ती श्रीराम मानवता भवन बनाने की वकालत
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फैजाबाद। पूरे देश में कई वर्षों से रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद संवेदनशील व जटिल समस्या के रूप में उभर आया है। भविष्य में यह समस्या और भी विकराल रूप धारण कर सकती है, ऐसी स्थिति में इसका सर्वमान्य हल अति आवश्यक हो गया है। अयोध्या में विश्ववर्ती श्रीराम मानवता भवन के निर्माण से पूरे विश्व को मानवता का संदेश जाएगा।
यह बातें एमआइटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी के एक प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने कही। प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों के अनुसार वर्ष 2010 में हाईकोर्ट के निर्णय के बाद दोनों समुदायों में असंतोष नहीं हो, इसके लिए पूर्व में ही विश्ववर्ती श्रीराम मानवता भवन की संकल्पना की गई थी। इसके अनुसार विवादित 2.77 एकड़ पर भव्य श्रीरामजन्मभूमि मंदिर का निर्माण व शेष 67 एकड़ भूमि पर हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन आदि धर्मों के पवित्र ग्रंथों के ज्ञान भवन बनाने की कल्पना थी। इसको पुनर्जीवित करने के लिए एमआइटी विश्व शांति प्रतिनिधिमंडल अयोध्या में लोगों की राय जानने का प्रयास करेगा। जिससे समस्या का समाधान हो सके। शिक्षाविद विश्वनाथ दा कराड ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक राजधानी के रूप में पहचान बनाने वाली अयोध्या में विश्ववर्ती श्रीराम मानवता भवन के निर्माण से अयोध्या पूरे विश्व को मानवता का संदेश देगी, जिससे वो फिर विश्व गुरु का दर्जा पा सकेगा। प्रतिनिधिमंडल ने रविवार को अयोध्या के रामजन्मभूमि, हनुमानगढ़ी में दर्शन करने के बाद कारसेवकपुरम गए, जहां पुरुषोत्तम नारायन सिंह से मुलाकात कर चर्चा की। प्रतिनिधिमंडल में विख्यात संगीतज्ञ व नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति पद्मविभूषण डॉ. विजय भटकर, एमआइटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष डॉ. विश्वनाथ दा कराड, नागपुर विश्वविद्यालय के पूर्व कुलगुरु डॉ. एसएन पठाण, रामजन्मभूमि न्यास के सदस्य रामबिलास दास वेदांती, पत्रकार वेद प्रताप वैदिक, फिरोज बख्त, पूर्व केंद्रीय मंत्री आरिफ मोहम्मद खान, पूर्व आइपीएस कमल टौरी, इस्लामिक विद्वान अनीस चिश्ती शामिल रहे।
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संत-धर्माचार्य और विहिप ने किया प्रस्ताव का विरोध
अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि के 2.77 एकड़ पर मंदिर तथा अधिग्रहित मंदिर परिसर में मस्जिद, गिरजाघर, गुरुद्वारा और बौद्धमठ के निर्माण की मांग की संत-धर्माचार्य और विहिप ने तीखी आलोचना की है। कहा कि यह देश में फिर से आग लगाने का षड़यंत्र है। श्रीराम जन्मभूमि न्यास अध्यक्ष और मणिराम दास छावनी के महंत नृत्य गोपाल दास महाराज ने दो टूक शब्दों में कहा कि अस्थाई मंदिर बन चुका है, अब शीघ्र ही रामलला श्रीराम जन्मभूमि न्यास द्वारा तराश कर रखे गये पत्थरों से निर्मित होने वाले भव्य मंदिर में विराजमान होंगे। कहा कि ऐसे में मुट्ठी भर लोग अयोध्या आकर परिसर में मंदिर मस्जिद और चर्च के निर्माण की बात कह दोबारा देश में आग लगाना चाहते हैं। केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल सदस्य और सदगुरुसदन गोलाघाट के महंत सियाकिशोरी शरण, मणिराम दास छावनी के उत्तराधिकारी केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल के सदस्य महंत कमलनयन दास शास्त्री, अयोध्या संत समिति के अध्यक्ष सनकादिक आश्रम के महंत कन्हैया दास समेत अन्य संतों ने कहा कि राग अलापने वाले समय-समय पर निकल पड़ते हैं। चेताते हुए कहा कि मंदिर निर्माण में बाधक न बने नहीं तो कोपभाजन का शिकार बन जाएंगे।
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