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भई प्रगट कुमारी भूमि-विदारी जन हितकारी भयहारी.....

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भई प्रगट कुमारी भूमि-विदारी जन हितकारी...
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अयोध्या। वैशाख शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि मंगलवार को जनक नंदिनी माता जानकी का जन्मोत्सव रामनगरी के विभिन्न मंदिरों में धूमधाम से मनाया गया। दोपहर 12 बजते ही मंदिरों में घंटा-घड़ियाल बजने लगे। प्राकट्य आरती में भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। भई प्रगट कुमारी भूमि-विदारी, जनहित कारी भयहारी। अतुलित छवि भारी मुनि-मनहारी जनक दुलारी सुकुमारी...जैसे गीत गुंजायमान होने लगे। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पवित्र सरयू नदी और सीताकुंड में स्नान व पूजा-अर्चना की। अयोध्या नगरी की चौरासी कोसी परिक्रमा भी सीताकुंड पर जाकर समाप्त हुई।
कनक भवन में जानकी नवमी पर्व पर विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम संपन्न हुए। यहां संचालित उत्सव की पूर्णाहुति पूर्णिमा के पर्व भगवान सीताराम की अष्ट सखियों में प्रधान सखी चारूशिला की जयंती को होगी। जनक नंदिनी का मायका माने जाने वाले जानकी महल में देवी मां का जन्मोत्सव श्रद्धापूर्वक मनाया गया व देर शाम भगवान को छप्पन प्रकार के व्यंजनों का भोग भी लगा। श्रीरामबल्लभाकुंज में अधिकारी राजकुमार दास की अध्यक्षता में जानकी नवमी का पर्व धूमधाम से मना। मध्याह्न प्राकट्य आरती हुई। बधाई गान का सिलसिला देर शाम तक जारी रहा। अधिग्रहीत परिसर से सटे रंगमहल मंदिर में भी महंत रामशरण दास की अध्यक्षता में जानकी जन्मोत्सव का पर्व हर्षोल्लास से मनाया गया। बड़ी संख्या में भक्त शामिल हुए। इसी तरह रामनगरी के अन्य मंदिरों मणिरामदास की छावनी, दशरथमहल, बड़ास्थान, डाडिया मंदिर, बडे़ हनुमान मंदिर, सियाराम किला, झुनकी घाट, जानकीघाट सहित अन्य मंदिरों में जानकी जन्मोत्सव पर विविध धार्मिक आयोजन संपन्न हुए।
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छोटी देवकली में सजी फूलबंगला झांकी
छोटी देवकाली मंदिर में जानकी जन्मोत्सव पर विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया। मंदिर परिसर में चल रहे अखंड श्रीरामनाम संकीर्तन की पूर्णाहुति भी हुई। सायंकाल मां देवकाली मंदिर में सुभव्य फूल बंग्ला झांकी सजाई गई। नाना प्रकार के सुगंधित पुष्पों से मां की भव्य झांकी भक्तों के श्रद्धाकर्षण का केंद्र बनी। इस अवसर पर मां की 1051 बत्ती की महाआरती भी उतारी गई। जिसमें बड़ी संख्या में भक्त शामिल हुए। देवकाली समाज के अध्यक्ष पंडित तारकेश्वरधर द्विवेदी ने बताया कि अन्य अनुष्ठानाें की पूर्णाहुति हवन-पूजन के साथ 28 अप्रैल को होगी। उत्सव का समापन 30 अप्रैल को कन्या बरूआ के भंडारे से होगा।
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संतों-श्रद्धालुओं ने की रामकोट की परिक्रमा
जानकी नवमी पर्व पर संत-श्रद्धालुओं ने परंपरागत ढंग से सरयू स्नान कर रामकोट की परिक्रमा की। अयोध्या धाम चैरासी कोसी परिक्रमा धर्मार्थ सेवा संस्थान के अध्यक्ष महंत गयादास के नेतृत्व में 84 कोसी परिक्रमा पूरी कर अयोध्या पहुंचें संतों ने भी रामकोट की परिक्रमा की। रामकोट की परिक्रमा कर परिक्रमार्थियों का जत्था सीताकुंड पहुंचा, जहां पूजा-अर्चना की गई। महंत गयादास ने बताया कि जानकी नवमी पर्व पर रामार्चा पूजन का शुभारंभ किया गया है। जिसका समापन बुधवार को होगा।
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