अयोध्या मामले की सुनवाई टलने से पक्षकार मायूस, संत नाराज
अयोध्या। अयोध्या मामले की सुनवाई एक बार फिर टलने से जहां पक्षकार मायूस हैं वहीं संत-धर्माचार्यों की नाराजगी बढ़ गई है। रामजन्मभूमि न्यास के सदस्य डॉ.रामविलास दास वेदांती ने कांग्रेस के इशारे पर सुनवाई टाले जाने की बात कही।
कहा, कांग्रेस के कपिल सिब्बल ने एक याचिका देकर मामले की सुनवाई लोकसभा चुनाव के बाद करने की अपील की थी, लगता है अब चुनाव के बाद ही सुनवाई किए जाने की तैयारी है।
कहा कि रामजन्मभ्ूामि सुनवाई के लिए न्यायाधीश नहीं मिल रहे हैं यह आश्चर्य की बात है, संत इस मामले पर गंभीर विचार कर रहे हैं। वहीं संतों ने भी चेतावनी दी है कि अब उनका धैर्य जवाब दे रहा है।
विहिप ने कहा है कि अब प्रतीक्षा नहीं होगी। 31 जनवरी व 1 फरवरी को कुंभ में होने जा रही धर्मसंसद में संत-धर्माचार्यों के निर्देश पर राममंदिर मामले में एक बड़ा निर्णय लिया जा सकता है। दूसरी तरफ मुस्लिम पक्षकार भी सुनवाई टलने से मायूस हैं।
उनका कहना है कि यदि इस मामले के समाधान में बहुत देर हुई तो दोनों समुदायों के बीच भाईचारा प्रभावित होने का खतरा बढ़ जाएगा। मुस्लिम पक्षकारों ने मुख्यमंत्री योगी के उस बयान पर नाराजगी जताई है जिसमें उन्होंने कहा है कि यदि अयोध्या मामला उन्हें सौंप दिया जाए तो 24 घंटे के भीतर राममंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त हो जाएगा।
श्रीरामजन्मभूमि न्यास के सदस्य महंत कमलनयन दास ने सुनवाई टलने पर नाराजगी व्यक्त की। कहा कि अब हमारा धैर्य जवाब देर रहा है। अभी तक हम सरकार व सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का इंतजार कर रहे थे लेकिन बार-बार तारीख मिलने से यह तय हो गया है कि न तो सरकार और न ही सुप्रीम कोर्ट इस मामले को लेकर गंभीर है, धर्मससंद में इस पर बड़ा निर्णय होगा।
निर्मोही अखाड़ा के महंत व हिंदू पक्षकार दिनेंद्र दास ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा अयोध्या मामले में की जा रही बेरुखी चिंतनीय है। आखिर हमारे रामलला कब तक टेंट में विराजमान रहेंगेे। जो संपूर्ण दुनिया का मालिक है, आज उसे न्यास के लिए स्वयं याची बनना पड़ रहा है। यह विडंबना नहीं तो और क्या है। कहा कि अब हम और प्रतीक्षा नहीं कर सकते, अब जल्द से जल्द इस मामले का समाधान होना ही चाहिए।
पक्षकार इकबाल अंसारी ने मुख्यमंत्री योगी के बयान पर कहा कि हमें मौका मिल जाए तो हम भी 24 घंटे में मस्जिद बना सकते हैं, लेकिन मामला सुप्रीम कोर्ट में है इसलिए न तो योगी और न ही पक्षकार कुछ कर सकते हैं। साधु-संत इस मसले में अपना-अपना काम साध रहे हैं। हम भी चाहते हैं इस मामले का जल्द समाधान हो लेकिन सुप्रीम कोर्ट जो निर्णय देगी वही मानेंगे।
मुस्लिम पैरोकार हाजी महबूब ने कहा कि योगी जी इस मामले का समाधान नहीं कर सकते, उनके बस की बात नहीं है कि 24 घंटे के अंदर इस मसले को हल कर दें। कहा कि मामला जल्द निपटना बहुत जरूरी है, हम भी जल्द समाधान चाहते हैं। मामले की सुनवाई जल्द से जल्द होनी चाहिए क्योंकि जितनी देरी होगी उतना ही आपसी भाईचारा व मनमुटाव बढ़ेगा और हम देश में अमन, शांति चाहते हैं।
विश्वहिंदू परिषद के प्रांतीय प्रवक्ता शरद शर्मा का कहना है कि देश के सबसे गंभीर विषय को लेकर सर्वोच्च न्यायालय स्वयं गंभीर नहीं है। तारीख पर तारीख देकर कब तक हिंदू समाज के धैर्य की परीक्षा ली जाती रहेगी। कहा कि 31 जनवरी व 1 फरवरी को कुंभ में होने वाली धर्मसंसद के बाद संतों के आदेश पर विश्व हिंदू परिषद इस मामले में एक बड़ा निर्णय लेने की तैयारी में हैं अब और प्रतीक्षा नहीं होगी।