अयोध्या। अवध विश्वविद्यालय के नए परिसर में शनिवार को हिंदुत्व की चाशनी में समरसता कुंभ के भव्य मेले का श्रीगणेश हुआ। समरसता कुंभ जाति में बंटे हिंदुओं को एकजुट करने के लिए महामंथन करने का माध्यम भी बना।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से लेकर मंच पर मौजूद संतों एवं संघ के पदाधिकारियों ने बार-बार यह स्पष्ट किया कि हमारी सनातन परंपरा में जाति व्यवस्था का कहीं कोई जिक्र नहीं है। जैन, सिख, बौद्ध सभी धर्मों के महापुरुषों ने भारतीय समाज को समरसता का एक सूत्र दिया है। वक्ताओं ने यह भी कहा कि जाति व्यवस्था का विरोध करना चाहिए, सभी एकरस, एकात्म समाज की स्थापना का संकल्प लेने का भी संकल्प दिलाते रहे।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सनातन समाज सदैव से समरस रहा है। सामाजिक समरसता के बगैर समृद्ध राष्ट्र का निर्माण नहीं किया जा सकता। कहा कि अयोध्या की धरती पर इस बात का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम की परंपरा ने कभी अस्पृश्यता के भाव को नहीं माना।
रामजन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास बोले कि कुंभ जैसे आयोजन यह साबित करते हैं कि हमारी सनातन परंपरा में जाति व्यवस्था के लिए कोई स्थान नहीं है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह भागैय्या जी भी समरसता पर केंद्रित रहे। कहा कि समरसता जीवन मूल्य का संदेश है। भारतीय समाज में छुआ छूत व अस्पृश्यता का कभी कोई स्थान नहीं रहा।
पुणे से पधारे स्वामी गोविंद देव गिरि जी ने हिंदुओं को एकजुट होने का आह्वान करते हुए कहा कि भारत में समरसता का भाव जिले-जिले, गांव-गांव में जगाने के लिए अपना योगदान देना ही साधना, ईश्वर की उपासना है। यही अपेक्षा हमसे रामलला रखते हैं। राज्यमंत्री ग्राम्य विकास उत्तर प्रदेश सरकार के डॉ. महेंद्र सिंह भी सामाजिक एकता पर जोर देते हुए बोले कि राष्ट्र की संपन्न सनातन परंपरा में सामाजिक भेदभाव के लिए कोई स्थान नहीं है।