एनडी विश्वविद्यालय में कुलपति ने ज्यादा वेतन देने पर लगाई रोक
फैजाबाद। एनडी विश्वविद्यालय में विभिन्न संवर्ग के कर्मियों को बगैर शासन से स्पष्ट आदेश आए ही दिए जा रहे उच्च वेतन पर कुलपति ने सख्ती से रोक लगा दी गई है। इससे प्रयोगशाला सहायक, सहायक लेखाकार, जूनियर रिसर्च एसोसिएट, फील्ड मैन, वरिष्ठ लिपिक, लिपिक, स्टोर कीपर संवर्ग के करीब 45 कर्मचारी प्रभावित हुए हैं। इनसे अब तक लिए गए अधिक वेतन के अंतर की वसूली का भी आदेश जारी किया गया है, इससे हड़कंप मचा हुआ है।
नरेंद्रदेव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अख्तर हसीब ने कहा कि लगातार शासनादेश की प्रत्याशा में 2004 से दिया गया उच्च वेतन अनियमितता की श्रेणी में आता है। अब स्पष्ट शासनादेश और बजट मिलने के बाद ही यह वेतन देय होगा। तब तक जारी शासनादेश के अनुसार वेतन निर्धारण कर भुगतान करने का आदेश दिया गया है। इस आदेश के क्रम में निदेशक प्रशासन व परिवीक्षण डॉ. प्रकाश सिंह ने विश्वविद्यालय के वित्त नियंत्रक एवं उनके अधीनस्थ लेखाकारों व पटलों को पत्र भेज कर निर्देशित किया है कि प्रत्याशा में अनुमन्य किये गये वेतन को निरस्त करते हुए ऐसे कर्मियों को शासनादेशानुसार वेतन निर्धारित करते हुए उनका वेतन आहरित किया जाए। साथ ही इन कर्मियों को अब तक दिये गये ज्यादा वेतन की वसूली हेतु प्रक्रिया प्रारंभ कर दें। विश्वविद्यालय प्रशासन ने अपने इस निर्णय से उत्तर प्रदेश शासन को भी अवगत करा दिया है। कुलपति ने निर्देशित किया है कि जिस विभाग अथवा कार्यालय से प्रत्याशा के क्रम में लिये गये निर्णय के विरुद्ध वेतन आहरण करने का प्रस्ताव प्रेषित किया जायेगा अथवा वेतन आहरित किया जायेगा, इसके लिए संबंधित अधिकारी व कर्मचारी सीधे तौर दोषी माने जायेंगे।
ज्ञात हो कि वर्ष 2004 से लगातार प्रत्याशा में दिये जा रहे उच्च वेतनमान को रोकने के लिये शासन से पत्राचार होता रहा फिर भी इसे लागू करने के बजाय ठंडे बस्ते में डाला जाता रहा। फिलहाल वर्तमान कुलपति प्रो. अख्तर हसीब ने कड़ा कदम उठाया है। कुलपति के निर्णय का सबसे ज्यादा प्रभाव प्रयोगशाला सहायक, सहायक लेखाकार, जूनियर रिसर्च एसोसिएट, फील्ड मैन, वरिष्ठ लिपिक, स्टोर कीपर व कनिष्ठ लिपिक संवर्ग के कर्मियों पर पड़ा है। ज्यादा वेतनमान दिये जाने के चलते विश्वविद्यालय अभी भी लगभग 14 करोड़ के घाटे के बजट में है, जिसका असर विवि कर्मियों के जीपीएफ. खाते पर पड़ा है।