अयोध्या। रामायण मेले की आखिरी शाम थाईलैंड के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत रामलीला और भजन संध्या के नाम रही। ध्वनि व प्रकाश पर आधारित थाईलैंड रामलीला का अभिनय खूब सराहा गया।
रामायण मेला के आखिरी दिन सांस्कृतिक संध्या की शुरुआत शुभारंभ थाईलैंड के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत रामलीला से हुई। संस्कृति मंत्रालय, थाईलैंड के अधीन कार्यरत द कालेज ऑफ ड्रामेटिक आर्ट्स के कलाकारों ने थाई परम्परा के तहत अपना नाट्य अभिनय ध्वनि एवं प्रकाश पर आधारित रिकार्डेड प्रस्तुति से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।
थाई भाषा में प्रस्तुत नाट्य अभिनय को खोन के नाम से जाना जाता है, थाई रामायण को रामकियन कहते हैं। प्रस्तुत रामलीला के मुख्य पात्रों में थाई भाषा में राम को फ्रा राम, लक्ष्मण को फ्रा लक, हनुमान को हनुमान व रावण को थोत्साकॉन के नाम से जाना जाता है।
प्रस्तुत रामलीला में राम, लक्ष्मण, हनुमान व रावण के मध्य युद्ध का दृश्य प्रस्तुत किया गया। विदेशी पात्रों के अभिनय ने दर्शकों को मंत्र-मुग्ध कर दिया।
भजन गायक प्रेम प्रकाश दुबे की सीडी का लोकार्पण जिलाधिकारी डॉ0 अनिल कुमार ने किया। संचालन देष दीपक मिश्र ने किया।
इस अवसर पर रामायाण मेला समिति द्वारा मंच पर प्रस्तुति दे चुके थाईलैंड एवं इंडोनेशिया के कलाकारों को सम्मानित भी किया गया।
इससे पूर्व सांस्कृतिक संध्या का शुभारम्भ अवध विवि के कुलपति व मुख्य अतिथि प्रो. मनोज दीक्षित ने गोस्वामी तुलसीदास के चित्र पर दीप प्रज्जवलित कर किया गया।
स्वागत रामायण मेला समिति के महामंत्री शीतला सिंह व दीप कृष्ण वर्मा, म. नारायणाचारी, शैलेंद्र मोहन मिश्र, संस्कृति विभाग के नोडल अधिकारी डॉ. योगेंद्र प्रताप सिंह ने किया।