फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पांच वरिष्ठ छात्र निलंबित, परिसर में घुसने पर भी रोक

विज्ञापन
विज्ञापन
जूनियर छात्रों से जबरन सादे कागज पर हस्ताक्षर करा शिक्षक का तबादला रद कराने का बनाया था दबाव
विज्ञापन

कुमारगंज (फैजाबाद)। नरेंद्र देव कृषि प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में शनिवार को विश्वविद्यालय अनुशासन समिति की बैठक में पांच वरिष्ठ छात्रों को सत्र आधार पर निलंबित किए जाने तथा उनके विवि परिसर में घुसने पर रोक लगा दी गई।

ध्यान रहे कि ये वहीं छात्र हैं जिन्होंने गत दिनों अपने जूनियर छात्रों से जबरन सादे कागज पर हस्ताक्षर कराकर विश्वविद्यालय से वाह्य केंद्र पर स्थानांतरित एक शिक्षक का स्थानांतरण रद कराने का दबाव बनाया था।
विज्ञापन


कृषि महाविद्यालय के कृषि अर्थशास्त्र विभाग के एमएससी द्वितीय वर्ग के पांच छात्रों में विकास सिंह सेंगर, अभिषेक पांडेय, उमाशंकर, प्रशांत कुमार व अभिषेक हैं। इन्हें विवि के छात्रों को भ्रमित कर विवि परिसर व छात्रावास में अराजकता फैलाने का दोषी पाया गया।

इनमें विकास सिंह सेंगर व अभिषेक पांडेय पर दो सेमेस्टर का निलंबन तथा उमाशंकर, प्रशांत कुमार व अभिषेक पर एक सेमेस्टर का निलंबन लगाते हुए उपरोक्त सभी छात्रों के दंडावधि में विवि परिसर में घुसने से रोक लगा दी गयी है।

इस दौरान परिसर में पाए जाने पर इनके विरुद्ध पुलिस कार्रवाई भी की जाएगी। बैठक में अधिष्ठाता छात्र कल्याण डा. एपी राव, डा. सुशांत श्रीवास्तव, निदेशक प्रशासन डा. आरके जोशी, वरिष्ठ प्राध्यापक डा. घनश्याम सिंह, डा. केएन सिंह समेत छात्रावास अधीक्षक उपस्थित रहे।

ट्रांसफर रुकवाने के लिया दिया था ज्ञापन
इन पांच छात्रों द्वारा जूनियर छात्रों को बहलाकर लगभग डेढ़ सौ छात्रों का हस्ताक्षर कराकर कृषि अर्थशास्त्र के सहायक प्राध्यापक रहे डा. केके सिंह का उनके मूलपद पर किया गया स्थानांतरण रुकवाने के लिए कुलपति को ज्ञापन दिया गया था।

दूसरे दिन ही इसकी भनक लगने पर अन्य छात्रों ने लिखित रूप से आरोपित पांचों छात्रों की हरकत का पर्दाफाश करते हुए अपने को इस तरह की गतिविधि में शामिल होने से इन्कार कर दिया गया।
विज्ञापन


अधिष्ठाता छात्र कल्याण डा. एपी राव तथा सहायक अधिष्ठाता छात्र कल्याण डा. सुशांत श्रीवास्तव ने अन्य शिक्षकों के साथ गठित समिति ने प्रकरण की जांच की तथा पांच छात्रों को दोषी पाते हुए इनके प्रकरण को अनुशासन समिति में रखने के लिए अपनी रिपोर्ट दी थी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें