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जागरुकता और तरक्की को समर्पित कला व साहित्य की हस्तियां

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फैजाबाद। डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विवि में चल रहे 12वें फिल्म फेस्टिवल में देश के प्रतिष्ठित साहित्यकारों, कहानीकारों, फिल्म निर्माता व निर्देशकों का जमावड़ा लगा है। विभिन्न क्षेत्रों के लोग अपनी-अपनी विद्या से समाज के निर्माण के लिए कार्य कर रहे हैं। सभी का मानना है कि विकास से ही देश आगे जा सकता है, लेकिन इसके लिए समाज को जागरूक होना जरूरी है। अयोध्या फिल्म फेस्टिवेल में सभी लोग अवाम में अपने स्तर से जागरूकता लाने के लिए प्रयासरत हैं। अमर उजाला ने शुक्रवार को फिल्म फेस्टिवल में आए विभिन्न क्षेत्रों के प्रमुख लोगों से बातचीत की।
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एक युद्ध कैंसर विरुद्ध फिल्म करेगी जागरूक : डॉ. राजीव श्रीवास्तव
प्रसिद्ध फिल्म डायरेक्टर डॉ. राजीव श्रीवास्तव जननायक जयप्रकाश और गंगा में गंदगी कैसे साफ हो जैसी अति चर्चित लघु फिल्म बनाकर समाज को नई दिशा दे चुके हैं। मौजूदा समय में राजीव श्रीवास्तव एक युद्ध कैंसर विरुद्ध की डॉक्यूमेंट्री तैयार कर रहे हैं। वह बताते हैं कि भारत में कैंसर रोगियों की संख्या बढ़ी है। प्रतिवर्ष भारत में 40 लाख लोग सिर्फ कैंसर के चलते मर जाते हैं।

फिल्म डायरेक्टर का मानना है कि जागरूकता से इसको काफी हद तक रोका जा सकता है। वह बताते हैं कि कैंसर से लड़ने के लिए आत्मविश्वास सबसे ज्यादा जरूरी है। इसके लिए डाक्यूमेंट्री में एक गीत भी कैंसर रोगियों को जागरूक करेगा। वह बताते हैं कि जागरूकता के लिए चर्चित शख्सियतों फिल्म अभिनेत्री मनीषा कोईराला सहित अन्य लोगों को जागरूकता का संदेश देते दिखाई देंगे।
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नर्मदा के विस्थापन पर लिख रहे किताब : पुष्पराज
वर्ष 2009 में नंदीग्राम डायरी पुस्तक के लेखन को लेकर चर्चा में आए पुष्पराज मौजूदा समय में नर्मदा के विस्थापन पर पुस्तक लिख रहे हैं। वह बताते हैं कि नर्मदा विस्थापन एक बड़ी त्रासदी है। 33 वर्षों तक चलने वाली इस लड़ाई में हजारों परिवारों की रोजी रोटी का जरिया छिना है, लेकिन इसी आंदोलन से ही देश के लोगों को पुनर्वास का हक भी मिला है।

वह बताते हैं कि मध्य प्रदेश का नेमार जिला भारत में व्यवस्थित खेती के लिए जाना जाता है। सरदार सरोवर बांध की वजह से यहां खेती नष्ट हो चुकी है। वह बताते हैं कि सरदार सरोवर बांध देश की शान नहीं, बल्कि दर्द की इंतहा का प्रतीक बन गया है। वह बताते हैं कि मौजूदा समय में घुमक्कड़ी का अर्थ सही माने में खो गया है।


किशन पोडवाल बनाएंगे अंतरराष्ट्रीय स्तर का संग्रहालय
चंबल के राबिनहुड के नाम से चर्चित किशन पोडवाल का सपना अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय बनाने का है। वह बताते हैं कि इसके लिए अपना घर दान कर चुके हैं। इसी में संग्रहालय का निर्माण करेंगे। वह बताते हैं कि इतिहास को संजोना व उसको युवा पीढ़ी तक पहुंचाना उनकी जिंदगी का मकसद है। अपने इटावा स्थित घर में संग्रहालय स्थापित किया है। इसमें मौजूदा समय में 20 से 22 हजार दुर्लभ किताबें है।

इसके अलावा दुनिया में लुप्त हो रहे पढ़ने-लिखने के सामान, फोटोग्रॉफी के कैमरे, वाद्ययंत्र सहित कई अन्य चीजें संरक्षित की जा रही हैं। साथ ही मौजूदा समय में संरक्षित डाक टिकट व लिफाफों की संख्या 40 से 50 हजार के बीच में है। भारत में जारी होने वाला डाक टिकट भी संरक्षित है। किशन पोडवाल बताते हैं कि उनके संग्रहालय में पुराने सिक्कों का बड़ा कलेक्शन उपलब्ध है। इसके अलावा 300 से 400 नक्शे भी उपलब्ध है। यह नक्शे अंग्रेजों के शासन करने के दौरान के है।



चित्रकाव्य की नई विधा को आगे बढ़ाने में जुटे संजीबा
नुक्कड़ नाटक से रंगमंच को नई दिशा देने वाले संजीबा मौजूदा समय में चित्रकाव्य से समाज को जागरूक करने में लगे हैं। वह बताते हैं कि व्यवस्था में अव्यवस्था के खिलाफ नुक्कड़ नाटक को एक औजार के रूप में प्रयोग किया है। वह बताते हैं कि कई बार अव्यवस्था के खिलाफ नुक्कड़ नाटक करने पर उनको जेल जाना पड़ा।

एक संस्मरण का जिक्र करते हुए वह कहते हैं कि लगभग 17 वर्ष पूर्व आशाराम के खिलाफ नुक्कड़ नाटक किया था, जिसमें प्रशासन ने उनको गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। कानपुर में लड़की लुट गई थाने में संबंधी नुक्कड़ नाटक पर पूरा थाना सस्पेंड हो गया। यह नुक्कड़ नाटक ठीक थाने के सामने हुआ था। चित्रकाव्य के बारे में बताते हैं कि यह दस्तावेज है। एक समय ऐसा आएगा कि लोग जागेंगे। वह कहते हैं कि हम लोग क्षितिज पर जितना कुछ कर सकते हैं कर रहे हैं।
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