बेहतर ब्रांडिंग हो तो देश-विदेश तक फैले गुड़ की महक
फैजाबाद। एक जनपद-एक उत्पाद कार्यक्रम में यहां गुड़ उत्पाद को चुना गया है, मगर घर-घर तक फैले इस कारोबार को आज भी औद्योगिक स्वरूप का इंतजार है। अच्छी मशीनें लगाने, उत्पाद के प्रमोशन, पैकेजिंग, मार्केटिंग व निर्यात को लेकर कुछ नहीं हुआ है।
राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ब्रांडिंग, रोजगार सृजन, उत्पाद की गुणवत्ता, तकनीकी उन्नयन, कौशल विकास समेत कामन फैसिलिटी सेंटर, टेस्टिंग लैब, व्यापार केंद्रों जैसी अवस्थापना सुविधाओं के विकास की जरूरत है।
यह सब हो जाए तो हजारों किसान परिवार और मजदूरों का जीवन स्तर उन्नति की ओर बढ़ेगा। एक जनपद-एक उत्पाद कार्यक्रम का शुक्रवार को लखनऊ में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद शुभारंभ करने आ रहे हैं।
हर जिले के एक उत्पाद को बढ़ावा देने के प्रयासों पर चर्चा होगी। यहां योजना के तहत गुड़ उत्पाद को चुना गया है। प्रमुख सचिव खादी एवं ग्रामोद्योग डॉ. नवनीत सहगल 29 मई को यहां आकर बैठक ले चुके हैं।
विशिष्ट उत्पाद ‘गुड़’ को लेकर फैजाबाद जैगरी एसोसिएशन के अध्यक्ष अविनाशचंद दुबे कहते हैं कि गुड़ में अनेक पोषक तत्व एवं औषधीय गुण पाए जाते हैं। जो स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभदायक है। जिले में हजारों किसान परिवार व मजदूर गुड़ रोजगार से जुड़े हैं।
लेकिन जरूरत है इसके उत्पादन के लिए आधुनिक इकाई और ब्रांडिंग की, ताकि उत्पाद को बेहतर बाजार मिले। गुण उत्पादकों की तमाम समस्याएं हैं। गन्ना मिलें भी इसमें कहीं न कहीं असर करती हैं।
गुड़ उत्पादकों ने गन्ना मिल से आठ किलोमीटर की दूर गुड़ उद्योग लगाने के प्रतिबंध को समाप्त करने की मांग भी की। उपायुक्त उद्योग आशुतोष सिंह ने कहा कि जिले में गुड़ उत्पादन की गुणवत्ता में सुधार व आर्गेनिक गुड़ के उत्पादन के लिए किसानों व गुण उत्पादकों को प्रेरित करने के लिए रूपरेखा बनाई गई है।
समस्याओं का समाधान के लिए एकल विंडो व्यवस्था की जाएगी। आर्गेनिक गुड़ के निर्यात के लिए एमोजॉन, फ्लिप कार्ड, वॉलमार्ट व अन्य कंपनियों से संपर्क कर ई-मार्केटिंग की जा सकती है।
जिलाधिकारी डॉ. अनिल कुमार ने कहा कि गांव में कृषि इकाई के तौर पर गुड़ उत्पादन की फैक्ट्री लगाने पर तीन साल तक कोई ब्याज नहीं लिया जाएगा। 35 प्रतिशत सब्सिडी अलग से मिलेगी।
गन्ना किसान आर्गेनिक खेती करते हैं तो उन्हें अधिक मूल्य मिलेगा और उनकी गुड़ उत्पादकों की स्थिति सुदृढ़ होगी। आर्गेनिक खाद्य पदार्थों की मांग विदेशों में भी बहुत अधिक है। गुड़ उत्पादन में नवीनतम आधुनिक टेक्नोलॉजी के प्रयोग से गुड़ की लागत को कम कर सकते हैं।
कभी सजती थी मंडी अब घरों तक सिमटा कारोबार
फैजाबाद। दिन-ब-दिन चीनी के कद्र दान बढ़ने से गुड़ के व्यवसाय को ग्रहण लग गया है। पूर्व में यहां लगभग 250 क्रेशर गन्ना पेराई कर गुड़, राब, शक्कर आदि तैयार करते थे। अब ऐसे क्रेशरों की संख्या घटकर लगभग 150 रह गई है। इससे ग्रामीणों के रोजगार पर भी फर्क पड़ा है।
लोग अपने गन्ने को खुद ही काटकर क्रेशर तक पहुंचाते और पेराई तक गुड़ बनाने में जीविका अर्जित करते। ऐसे लोगों की तादाद 10 हजार से अधिक थी। यही नहीं हजारों लोग मजदूरी कर नवंबर से फरवरी तक अच्छी खासी कमाई कर लेते थे।
एक समय गुड़ के व्यवसाय में अपना अहम स्थान रखने वाली मंडियां अब ग्राहकों से सूनी रहती हैं। निर्माण के सापेक्ष मांग कम होने व बाजार की अनिश्चितता से इस व्यवसाय को धक्का लगा है।
शासन की अनदेखी भी खांड़सारी उद्योग को झटका देने में अहम भूमिका निभाई। स्थिति यह है कि गन्ने के रिकॉर्ड उत्पादन के बावजूद गुड़ का उत्पादन कम हुआ है।