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अयोध्या के सिरमौर थे आचार्य रामवल्लभाचार्य: नृत्यगोपाल दास

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अयोध्या के सिरमौर थे आचार्य रामवल्लभाचार्य: नृत्यगोपाल दास
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अयोध्या। आचार्य रामवल्लभाचार्य की 157वीं जयंती पर मणिराम दास छावनी में संत धर्माचार्यों ने उन्हें स्मरण कर पुष्पांजलि अर्पित की। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्त्रस्म में श्रीरामजन्मभूमि न्यास अध्यक्ष श्रीमणिराम दास छावनी के महंत नृत्यगोपाल दास ने कहा कि आचार्य रामवल्लभाचार्य अयोध्या के सिरमौर थे। वे संत सनातन धर्म की मेरुदंड हैं, जिनके स्मरण मात्र से औलोकिक शक्ति का संचार होता है।
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उन्होंने कहा कि अपने संस्कारों से समाज में व्यापक परिवर्तन का सूत्रपात करने वाले महापुरुष हर समय जीवित रहते हैं। सनातन धर्म को प्रतिष्ठित करने में श्रीरामार्चा पूजन विधि को सर्वव्यापी बनाने वाले आचार्य के चरित्र को जन-जन तक पहुंचाने की आवश्यकता है। रामवल्लभाकुंज के महंत रामशंकर दास वेदांती ने कहा महाराज श्री का जीवन समाज के उद्धार के लिये समर्पित रहा, उनके द्वारा स्थापित किया गया पौधा आज वटवृक्ष बनकर समाज में व्यापक छाप छोड़ कर संत परंपरा को जीवित रखे हुए है। महंत गोविंद दास ने कहा आचार्य रामवल्लभाचार्य ने ज्ञान के साथ सेवा को प्रमुखता दी। मानस भूषण राम मंगल दास ने कहा समाज और राष्ट्र का कल्याण करने हेतु ही संत महापुरुषाें का अवतरण होता है। संचालन रघुनाथ दास ने किया। इस दौरान मणिराम दास छावनी के सचिव कृपालु राम दास, रमेश दास शास्त्री, महंत छविराम दास, राजकुमार दास, महंत जनार्दन दास, महंत शशिकांत दास, विहिप प्रवक्ता शरद शर्मा, महंत रामदास, संत जानकी दास, संत राजेन्द्र शास्त्री सहित अन्य संत धर्माचार्यों ने पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें स्मरण किया।
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