विभाग ने आदेश फर्जी होने की पुष्टि की
फैजाबाद। शिक्षामित्रों को मूल पद पर वापसी और 17 हजार रुपये मानदेय नियत किये जाने का सचिव बेसिक शिक्षा परिषद कार्यालय से कथित रूप से जारी पत्र के वायरल होने से शिक्षामित्रों में हड़कंप मच गया। बाद में शासन सूत्रों ने उक्त आदेश को फर्जी बताया और कहा कि उक्त आदेश का सत्यता से कोई लेना-देना नहीं है।
संजय सिन्हा सचिव बेसिक शिक्षा परिषद उप्र. का हस्ताक्षरित एक आदेश मंगलवार को वायरल हुआ, जिसमें शिक्षामित्रों को मूल पद पर बने रहने तथा 17 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय दिए जाने की बात कही गई। एक सप्ताह में पदभार ग्रहण न करने पर सेवामुक्त किए जाने का भी जिक्र था।
इस आदेश से शासन के अधिकारी सहित सभी शिक्षामित्र बेचैन हो गए। अधिकारियों को भी इस संबंध में कोई सूचना नहीं मिली थी। वहीं, आदर्श समायोजित शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन की प्रांतीय बैठक लखनऊ में चल रही थी।
जिसमें प्रांतीय अध्यक्ष जितेंद्र शाही ने एलान किया कि यदि यह पत्र फर्जी है तो सरकार मामले की जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई करे। इस आदेश ने शिक्षामित्रों को आघात पहुंचाया है। जिसे किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
जिलाध्यक्ष अनुज सिंह ने कहा कि शिक्षामित्रों के जज्बातों से खेलने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। कहा कि सरकार अध्यादेश लाकर सभी को शिक्षक बरकरार रखे, अन्यथा आर-पार की लड़ाई के लिए हम तैयार हैं।
वायरल आदेश फर्जी
शिक्षामित्रों को मानदेय दिए जाने का जारी हुआ पत्र भ्रामक एवं फर्जी है। इसका सत्यता से कोई संबंध नहीं है। इस प्रकार का आदेश न तो जारी हुआ है और न ही इस संबंध में कोई सूचना प्राप्त हुई है।
-अमिता सिंह, बीएसए