सरयू के रौद्र रूप से कछार के 22 गांवों में हलचल, गांव छोड़ पलायन तेज
फैजाबाद। उफनाई सरयू का कहर तेज हो गया है। बाढ़ से घिरे कक्षार के 22 गांवों में सैकड़ों घरों और निकलने के रास्ते पानी से डूबे हुए हैं। रुदौली तहसील के कैथी माझा में नदी ने तीन और घरों को लील लिया है।
यहां इस साल नदी में समाने वाले घरों की संख्या 15 हो गई है। इस बीच दोपहर तीन बजे स्थिर नदी फिर एक सेंमी प्रतिघंटे की रफ्तार से उफान भर रही है। नदी लाल निशान से 59 सेंमी ऊपर है। केंद्रीय जल बोर्ड के मुताबिक, सरयू का खतरा बिंदु 92.73 मीटर है।
नदी तीन दिन से नदी काफी धीमी गति से बढ़ाव पर है। सोमवार को रविवार को मुकाबले सुबह 8 बजे मात्र तीन सेंमी बढ़कर लाल निशान से 58 सेमी ऊपर रिकार्ड हुई। इसके बाद अपराह्न तीन बजे तक नदी स्थिर रही। मगर इसके बाद तेजी से जलस्तर में वृद्धि शुरू हो गई है।
शाम चार बजे तक एक सेंमी प्रतिघंटे की रफ्तार दर्ज हुई है। बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता जेपी यादव का कहना है कि रविवार को शारदा बैराज से एक लाख 42 हजार 466 क्यूसेक, गिरिजा बैराज से एक लाख 55 हजार 103 क्यूसेक व बनबसा बैराज से 81 हजार 24 क्यूसेक छोड़े गए पानी का असर सोमवार को अपराह्न से यहां दिख रहा है।
पहाड़ों व मैदानी इलाकों में हो रही बारिश से जलस्तर अभी बढ़ेगी। उधर, घाघरा की बाढ़ से प्रशासन ने रुदौली के महंगू का पुरवा में कटान रोकने में सफलता तो पा ली है, मगर चारों ओर से धाराओं में धिरे कैथी माझा का अब भगवान ही मालिक है।
यहां कुल 71 घरों में से इस साल बाढ़ में अबतक 15 घर नदी में समा चुके हैं। रविवार को तेजपाल, नन्हके और चिरकूट का घर नदी की कटान में विलीन हो गए। तीनों का कहना है कि प्रशासन से नाव तक नहीं मिल रही है, किसी तरह किराए की नावों से गांव के लोग भागकर गोंडा बंधे पर शरण ले रहे हैं।
लोगों का आरोप है कि प्रशासन की ओर से बाढ़ पीड़ितों के सिर ढकने के लिए तिरपाल व पॉलीथिन भी मुहैया नहीं कराई गई है। बारिश के समय स्थिति और भयावह हो जाती है। वहीं सदर तहसील के बिल्वहरि बंधे के निकट राय पहलवारा और सराय राशी के ग्रामीणों का कहना है कि पूरा गांव बाढ़ से घिरा है और लोगों ने बंधे पर ठिकाना बना लिया है।
वहीं गोसाईगंज के निकट बढ़ईपुरवा, पंडितपुरवा एवं नऊवनपुरवा गांवों में कटान तेज होने से लोगों की मुश्किलें बढ़ी हैं। पूराबाजार के तटीय इलाकों रास्ते पानी से लबालब हो गए हैं। कछार से लोग घर-बार छोड़ बंधे पर शरण ले रहे हैं। मगर राहत व बचाव को लेकर प्रशासन निष्क्रिय दिख रहा है।
स्वास्थ्य विभाग की टीम कहीं नहीं दिख रही है, जबकि बुखार, जुकाम समेत पेट जनित बीमारी से कई पीड़ित हैं। यहां सिर्फ चार नावें प्रशासन ने उपलब्ध कराई है, जबकि बाढ़ में फंसे पीड़ितों की संख्या चार सौ से अधिक हैं।
एडीएम वित्त एवं राजस्व एमसी दूबे का कहना है कि बाढ़ क्षेत्रों में पीड़ितों की हर संभव मदद करने के निर्देश राजस्व कर्मियों को दिए गए हैं। रुदौली के एसडीएम गिरिजेश चौधरी का कहना है कि कैथी मांझा चारों तरफ से बाढ़ से घिरा है, नदी का करंट रुदौली की ओर तेज है, इसलिए लोग गोंडा सीमा में जा रहे हैं।
18 स्कूलों में पढ़ाई ठप
शहर के कक्षारीय इलाकों समेत पूराबाजार, सोहावल, मया व रुदौली के बाढ़ प्रभावित गांवों और रास्तों पर भरा है। इन इलाकों में करीब 18 स्कूलों में पढ़ाई ठप है।