मनरेगा मॉडल प्लान बनाने कोटसराय पहुंची विशेषज्ञों की टीम
फैजाबाद। भविष्य में मनरेगा की परियोजनाएं जमीन के अंदर और बाहर की स्थिति के आधार पर तैयार की जाएंगी। इसके लिए नई टेक्नोलॉजी आधारित मॉडल प्लान तैयार किया जा रहा है।
जियोग्राफिकल सर्वें के आधार पर मॉडल प्लान देश की 15 ग्राम पंचायतों से बनेगा। इसे तैयार करने के लिए ही विशेषज्ञों की तीन सदस्यीय टीम गुरुवार को मसौधा विकासखंड के कोटसराय गांव पहुंची।
इसमें भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय और जीआई-जेड संस्था के विशेषज्ञ शामिल हैं। विशेषज्ञों ने गांव का भौगोलिक निरीक्षण किया। लोगों से यहां की आवश्यकता जानी। फिर विभिन्न विभाग के अफसरों के साथ मॉडल को लेकर चर्चा की।
मनरेगा में भविष्य में परियोजनाएं जमीन के अंदर और बाहर की स्थिति के आधार पर तैयार होंगी जो दीर्घकालिक और ज्यादा उपयोगी हों। इसी को लेकर ग्रामीण विकास मंत्रालय मनरेगा मॉडल प्लान तैयार करवा रहा है।
इसके लिए चुनी गई देश की 15 ग्राम पंचायतों में से प्रदेश की दो ग्राम पंचायतों शामिल हैं। यह दोनों ग्राम पंचायतें जिले की मसौधा विकासखंड से कोटसारय और उसरू अमौना हैं।
गुरुवार को भारत सरकार की प्रोग्राम अफसर अनामिका शर्मा, नेहा सक्सेना और संस्था जीआईजेड-इंडिया के राजीव आहूजा शामिल ने विकास भवन में डीसी मनरेगा सहित अन्य के साथ बैठक की।
बताया कि मनरेगा को ज्यादा उपयोगी और दीर्घकालिक बनाए जाने के लिए अब भुवन एप से संबंधित गांव के अंदर और बाहर की भौगोलिक स्थिति का आंकलन करके वहां के लिए उपयोगी परियोजनाएं बनाए जाने का प्रयास है।
भुवन एप से यह पता चल जाता है कि अंदर क्या है। उदाहरण के तौर पर बताया गया कि जमीन के अंदर दरारें होंगी तो वहां तालाब का निर्माण नहीं कराया जाना चाहिए। अन्यथा पानी रिसकर अंदर चला जाएगा।
इसके बाद टीम के सदस्य मॉडल प्लान पर काम करने के लिए कोटसराय पहुंचे। गांव का कुछ हिस्सा सरयू की कछार और कुछ हिसा सामान्य है। टीम के विशेषज्ञों उपरहार के अलावा एक छोटी नदी को पार करके सरयू के कछार का निरीक्षण किया।
चकरोड, तालाब सहित अन्य निर्माण देखे। प्रधान प्रतिनिधि प्रदीप सिंह के मुताबिक गांव के लोगों ने बांध बनवाने की बात कही। इसके साथ ही वहीं की जलवायु, पौधे और फसल के साथ मिट्टी के बारे में जानकारी ली।
उपायुक्त मनरेगा नागेंद्र मोहन राम त्रिपाठी ने बताया कि विशेषज्ञों की टीम ने मनरेगा मॉडल प्लान के लिए कोटसराय गांव का भौगोलिक सर्वे किया। वहां जियोलाजिकल आधारित पर भविष्य की आवश्यकता और परियोजनाओं को लेकर आंकड़े जुटाए।