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उफनाई सरयू, राहत और बचाव के इंतजाम नाकाफी

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उफनाई सरयू, राहत और बचाव के इंतजाम नाकाफी
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फैजाबाद। बैराजों से छोड़े जा रहे पानी के चलते सरयू का जलस्तर गुरुवार को 93.31 मीटर तक पहुंचा गया। यह खतरे के निशान से 57 सेमी. ऊपर है। अयोध्या-बिल्हरघाट, रौनाही तटबंध व अयोध्या के मांझा इलाके में नदी की बाढ़ से तटवर्ती गांव घिर गए हैं।

कई घरों में पानी घुसने से लोग पलायन कर गए हैं। एबी तटबंध के मडना, मूडाडिहा, उरदहवा, मांझा बलूईया समेत कई गांव व रौनाही तटबंध पर स्थित मंहगू का पुरवा व कैथी मांझा गांव चारों तरफ से पानी से घिरा हुआ है। पर्याप्त नाव के इंतजाम न होने से हालात खराब है।
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अभी तक किसी भी इलाके में राहत सामग्री बांटने का काम नहीं शुरू हुआ है। प्रशासन की ओर से किए गए उपाय नाकाफी साबित हो रहे हैं। बुधवार शाम पांच बजे से लगातार बढ़ रही सरयू ने गुरुवार को दोपहर दो बजे के बाद 93.31 मीटर पर आकर ठहर गई।

हालांकि सुबह भी शारदा, गिरजा व सरयू बैराज से 2.34 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। जो बुधवार की अपेक्षा 6 हजार 779 क्यूसेक कम था। अगले 24 घंटे तक सरयू स्थिर रहने के बाद घटने का क्रम शुरू हो सकता है।

दूसरी ओर प्रशासन की तैयारियां पूरी तरह से फेल साबित हुई हैं। कैथी मांझा के 71 परिवारों को अभी तक सिर्फ दो लीटर मिट्टी का तेल व एक ही नाव मुहैया कराई गई है।

रौनाही तटबंध पर बाढ़ राहत के लिए बनी दो चौकियां महंगू का पुरवा व बरई पर राजस्व के लेखपाल व पशुपालन विभाग के कर्मचारियों के अलावा अन्य विभाग के कर्मचारी लगातार नदारद ही रहते हैं। राशन सहित अन्य वितरण सामग्रियां अभी तक राहत कैंपों पर नहीं पहुंच पाई हैं।

नदी में बढ़ते जलस्तर से मुडाडिहा ,सलेमपुर, उरदहवा ,पिपरी संग्राम, बलुईया ,धनाई का पुरवा, माझा मडना व माझा रामपुर पुवारी सहित लगभग दर्जनों गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं।

सरयू का रौद्र रूप देखकर बाढ़ पीड़ित अपने निजी वाहन से घर का सामान सुरक्षित स्थान पर ले जा रहे हैं। ज्ञात हो कि पिपरी संग्राम माझा पिछले साल आई बाढ़ की चपेट में 90 प्रतिशत गांव नक्शे से गायब हो चुका है 10 प्रतिशत गांव अपने अस्तित्व के लिए जंग कर रहा है।

वहीं दूसरी ओर दशरथ समाधि स्थल से मुडाडिहा जाने वाले मार्ग पर बाढ़ का पानी भर गया है और काफी तेज बहाव होने के बाद भी बच्चे उसी रास्ते से विद्यालय आ और जा रहे हैं।

एक ओर जहां इन बच्चों का पूरा गांव बाढ़ की चपेट में है वहीं स्कूल जाने के लिए नदी के पानी में घुसकर जाने के लिए विवश हैं। जिसके चलते इन नौनिहालों की जिंदगी दांव पर लगी हुई है।

बाढ़ राहत केंद्र पर लगी ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों में से केवल मुडाडिहा की नेकपाल सूर्यभान यादव के अलावा सभी कर्मचारी गायब मिले। जिससे बाढ़ पीड़ितों में आक्रोश दिखा न ही स्वास्थ्य विभाग का कोई कर्मचारी था न ही पशु चिकित्सक नजर आए।

मुडाडिहा के नेकपाल से बात करने पर बताया कि चार नाव लगा दी गई है अगर आवश्यकता पड़ी तो और बढ़ा दी जाएगी। बाढ़ खंड सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता जेपी यादव ने बताया कि सरयू का जलस्तर दोपहर दो बजे 93.31 मीटर पर पहुंचने के बाद ठहर गया है।
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कछार में पानी अवश्य पहुंच गया है लेकिन दोनों तटबंध पूरी तरह से सुरक्षित हैं। पिछले तीन दिनों में बैराजों से कम छोड़े गए पानी के कारण अगले 24 घंटे तक सरयू के स्थिर रहने व इसके बाद जलस्तर में गिरावट दर्ज किए जाने की संभावना है।
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