अयोध्या के संत तुलसीघाट व बैकुंठ धाम में भरा बाढ़ का पानी
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मजबूरी में शव को नदी में किया प्रवाहित
बस्ती जिले के विशनपुर गांव से मृतक के अंतिम संस्कार के लिए अयोध्या आए परिवारीजनों ने मृतक का अंतिम संस्कार करने के बजाए उसको प्रवाहित करना ही उचित समझा।
पूछे जाने पर परिवारीजन रामयज्ञ, तीर्थ, सुखदेव, रामानुज ने बताया कि वे संत तुलसीदास घाट पर शवदाह के लिए आए थे, लेकिन यहां बाढ़ का पानी भरा हुआ है, जिससे मजबूर होकर शव को नदी में प्रवाहित कर दिया है।
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एक चिता पूरी तरह जली नहीं, दूसरी बिछ गई
अयोध्या में शवदाह के लिए बनाए गए बैकुंठ धाम में हालात और भी खराब है, घाट पर मात्र यही एक जगह बची है जहां चिता किसी तरह जलाई जा रही है। यहां पर बने करीब 8 फुट ऊंचे प्लेटफार्म तक पहुंचने के लिए लोगों को घुटने पानी में होकर गुजरना पड़ रहा है, वहीं इस प्लेटफार्म पर एक चिता पूरी तरह जल भी नहीं पा रही है तो दूसरी बिछा दी जा रही है।
शव का अंतिम संस्कार कराने वाले महापात्र नीलू पाठक व गंगा प्रसाद के अनुसार, यहां प्रतिदिन 60 से 70 शव आ रहे हैं, अब जरा भी पानी और बढ़ा तो बाईपास किनारे ही अंतिम संस्कार हो पाएगा। अंतिम संस्कार में शामिल होने पहुंचे गोरखपुर निवासी सनातन प्रसाद व उत्कर्ष शुक्ला ने बताया कि बैकुंठ धाम में पानी भर गया है, बड़ी दिक्कतों के बीच अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी हो पा रही है।
अयोध्या। बाढ़ की विभीषिका लोगों के जीवन पर प्रभाव तो डाल ही रही हैं, वहीं मृतकों के अंतिम संस्कार में भी अब दुश्वारियां आने लगी है। जिले के शवदाह स्थल बाढ़ में डूबे होने के कारण लोग यहां शवों को सीधे पानी में प्रवाहित कर दे रहे हैं।
ऐसा तब हो रहा है कि जब एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) ने इस पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा रखा है। उसने ऐसा करने से रोकने की जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन को दे रखी है। मगर प्रशासन इस समस्या के समाधान को लेकर शांत बैठा है।
अयोध्या में फैजाबाद के अलावा गोंडा, बस्ती, गोरखपुर, सिद्धार्थनगर व अंबेडकरनगर समेत आसपास के जिले के दर्जनों लोग अपने मृत परिवारीजनों के अंतिम संस्कार के लिए आते हैं। यहां सरयू तट पर रेलवे पुल के निकट संत तुलसीघाट व बाईपास पर बने बैकुंठ धाम पर अंतिम संस्कार किया जाता है, बाढ़ के चलते ये दोनों क्षेत्र पूरी तरह जलमग्न हो चुके हैं।
ऐसे में यहां मृतकों के अंतिम संस्कार में समस्या आ रहा है। कुछ लोग यहां शवों को सीधे पानी में प्रवाहित कर दे रहे हैं। वहीं, बैकुंठ धाम पर बने प्लेटफार्म पर ही अंतिम संस्कार किया जा रहा है। यहां तक पहुंचने के लिए लोगों को घुटने तक पानी में होकर गुजरना पड़ रहा है।
जिले के पूरा बाजार स्थित मूड़ाडीहा व मया स्थित दिलासीगंज में बने शवदाह केंद्र भी बाढ़ की भेंट चढ़ चुके हैं, ऐसे में यहां भी शवों के अंतिम संस्कार में मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है। समस्या गहराने के बाद भी प्रशासन का ध्यान अभी इस ओर नहीं गया है।
जिसके चलते कोई वैकल्पिक इंतजाम नहीं किए जा सके हैं। वहीं, इस संदर्भ में एडीएम वित्त व राजस्व एमसी दूबे ने बताया कि उन्हें इस संदर्भ में कोई जानकारी नहीं है, इसको देखकर आवश्यक सुविधा मुहैया कराई जाएगी।
दूषित हो रहा जल
एक तरफ कटान के चलते नदी अपने साथ पेड़-पौधे के साथ-साथ जानवरों का शव भी बहा रही है। इसके चलते नदी में प्रदूषण बढ़ रहा है। वहीं, लोग मजबूरी में शव को जलाने के बजाए उसे नदी में प्रवाहित कर दे रहे हैं, जबकि एनजीटी के नियमों के तहत ऐसा करना अपराध की श्रेणी में आता है।
क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी स्वामीनाथ राम का कहना है कि आपदा की स्थिति में दिक्कतें होती है। तमाम मृत पशु भी बाढ़ में बहकर प्रदूषण फैलाते हैं। इस पर किसे नोटिस दी जाए।