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अवध विवि के विद्यार्थियों को ढीली करनी होगी जेब

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अवध विश्वविद्यालय की बढ़ेगी प्रवेश व परीक्षा फीस
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फैजाबाद। डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय संबद्ध 632 महाविद्यालयों समेत विश्वविद्यालय परिसर में चलने वाली कक्षाओं के विद्यार्थियों को अब जेब ढीली करनी होगी। प्रवेश व परीक्षा फीस में बढ़ोत्तरी को लेकर मंत्रणा के बाद प्रस्ताव बनकर तैयार है, जिसे 31 जनवरी को विश्वविद्यालय कार्य परिषद की बैठक में मंजूरी के लिए पेश किया जाएगा। यह बढ़ोत्तरी चार विश्वविद्यालयों से फीस का तुलनात्मक अध्ययन करने के बाद लागू करने की तैयारी है। चर्चा है कि फीस में 15 प्रतिशत तक बढ़ोत्तरी हो सकती है।
अवध विश्वविद्यालय में वर्ष 2003 से 2006 तक कुलपति रहे एसबी सिंह के कार्यकाल में अवध विश्वविद्यालय ने फीस में बढ़ोत्तरी की थी। इसके बाद अब तक 12 वर्ष बीतने को है, फीस में कोई बढ़ोत्तरी नहीं हुई। अभी तक आसपास के सभी विश्वविद्यालयों की तुलना में अवध विश्वविद्यालय परिसर की फीस सबसे कम है। इस बीच विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि 12 साल की परिस्थितियों में काफी अंतर आया है। विश्वविद्यालय में सुविधाएं बढ़ी हैं लेकिन आमदनी बढ़ने के बजाय घटी है। विश्वविद्यालय को सबसे ज्यादा नुकसान चार जिलों के कट जाने से भी हुआ है। बलरामपुर और श्रावस्ती जिले सिद्धार्थनगर में खुलने वाले विश्वविद्यालय और अमेठी व प्रतापगढ़ के कॉलेज इलाहाबाद विश्वविद्यालय से संबद्ध हुए है। इन जिलों के कटने से लगभग 200 महाविद्यालय कम हो गए हैं। इसका असर विश्वविद्यालय की अर्थिक परिस्थितियों पर भी पड़ा है। ऐसे में विश्वविद्यालय प्रशासन फीस बढ़ाने की तैयारी में है। हालांकि इससे छात्रों की जेब ढीली होगी लेकिन विश्वविद्यालय की सेहत में सुधार होने के आसार हैं।
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विश्वविद्यालय की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए लंबे समय बाद फीस बढ़ाया जाना जरूरी है। आसपास के विश्वविद्यालय का अध्ययन कर नए फीस ढांचे का प्रस्ताव तैयार किया गया है, इसकी मंजूरी कार्य परिषद की बैठक में होनी है।- संजय कुमार, कुलसचिव अवध विश्वविद्यालय

ऑनलाइन प्रक्रिया पर खर्च हो रही भारी-भरकम रकम
खर्चे कम होने के बाद भी विश्वविद्यालय ने ऑनलाइन प्रक्रिया पर पूरा ध्यान केंद्रित किया है। पोर्टल आदि हाइटेक करने में खर्च बढ़े हैं। अब शिक्षकों के प्रमाण पत्रों के सत्यापन से लेकर सभी प्रकार के कार्य ऑनलाइन होने जा रहे हैं। प्रवेश संबंधी व अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजों को एकत्रित करने के कार्य पूर्ण किए जा चुके हैं। मार्कशीट देने की प्रक्रिया भी अंतिम दौर में है। इसके बाद संबद्ध महाविद्यालयों को विश्वविद्यालय आने की आवश्यकता नहीं होगी। वह विश्वविद्यालय की वेबसाइट से सीधे मार्कशीट का प्रिंट ले सकेंगे।
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शोधार्थियों को मानदेय देने की मांग
डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय में शोधार्थियों को मानदेय नहीं मिलता है। इससे शोधार्थियों को अपनी जेब से रकम लगाकर शोध करने पड़ते हैं। कार्य परिषद सदस्य ओम प्रकाश सिंह का कहना है कि यह कहीं न कहीं विश्वविद्यालय की प्रगति मेें बाधक हैं। उन्होंने फेलोशिप करने वाले छात्रों को तीन हजार से पांच हजार रुपये प्रतिमाह दिए जाने की मांग की है। उनका कहना है कि यह प्रस्ताव भी मंजूर हो गया है, अब कार्य परिषद में अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
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