फैजाबाद। धनतेरस को लेकर बाजार तैयार हो गया है। कारोबारियों ने अपने स्टॉक फुल कर लिए हैं। ग्राहकों को अपनी ओर खींचने के लिए तरह-तरह के ऑफर भी दे रहे हैं। वहीं दूसरी ओर शुभ मुहुर्त में धन की देवी लक्ष्मी के पूजन की भी तैयारी पूरी कर रखी है।
सोमवार को धनतेरस पर होने वाली धन वर्षा को सहेजने के लिए व्यवसायियों ने पूरी तैयारी कर ली है। धनतेरस को लेकर कारोबारी विशेष उत्साहित हैं। शहर में विशेष रूप से धनतेरस पर नए बर्तन खरीदने का चलन है, वहीं इलेक्ट्रॉनिक उपकरण व नई गाड़ी की भी लोग खरीदारी करते हैं।
मान्यता है कि इस नई वस्तु के साथ घर में धन की देवी के साथ धन के देवता कुबेर का आगमन होता है। वे साल भर संबंधित परिवार में धन वर्षा करते रहते हैं। इसे लेकर अभी से बाजार सज गया है। नए बल्ब की झालरों से कारोबारियों ने अपने प्रतिष्ठान को सजा लिया है। वहीं धनतेरस के दिन फूलों से इसकी सजावट के लिए ऑर्डर बुक करा रखा है।
दुकानदारों ने अतिरिक्त काउंटर खोलने की तैयारी कर ली है. इसके लिए अतिरिक्त कर्मी को भी तैनात कर लिया है. इलेक्ट्रॉनिक दुकानों पर लैपटॉप, मोबाइल, फ्रिज, वाशिंग मशीन आदि के साथ ही बर्तन दुकान व बाइक-कार आदि की अग्रिम बुकिंग लोगों ने करा रखी है।
ग्राहकों को रिझाने के लिए व्यावसायियों ने कई तरह के ऑफर की भी घोषणा कर रखी है। कोई छूट दे रहा है तो कोई सामान की खरीदारी पर गिफ्ट लेकर तैयार बैठा है। इसका प्रचार-प्रसार भी कराया जा रहा है। बाजार की स्थिति को देखते हुए लाखों के कारोबार के असार हैं।
धनतेरस पर्व को लेकर बाजारों में उत्साह देखा जा रहा है। धनतेरस पांच नवंबर को है। इस दिन अमृत सिद्धि योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और सोम प्रदोष भी पड़ रहे हैं। सूर्योदय से लेकर रात 8:33 बजे तक हस्त नक्षत्र है। यह चंद्रमा का नक्षत्र होता है। इस अवधि में सोना चांदी, गणेश-लक्ष्मी समेत परिवार की जरूरत का सामान खरीदना शुभ रहेगा।
सोमवार रात 11:45 बजे से भद्रा लग जाएगी। इस समयावधि के बाद कोई भी वस्तु नहीं खरीदी जाएगी। आचार्य शिवेंद्र ने बताया कि धनतेरस में दीपदान शाम को 5:14 बजे से 7:50 बजे तक शुभ रहेगा। प्रवेशद्वार पर अनाज की ढेरी लगाकर और दक्षिण दिशा में तिल के तेल का दीपक जलाना शुभ रहेगा।
आचार्य शिवेंद्र बताते हैं कि भगवान धनवंतरि की पूजा सोमवार रात 8:33 बजे से होगी। भगवान धनवंतरि को हर, बहेड़ा, केसर, आंवला व हल्दी अर्पित करने से रेाग और व्याधि दूर होती है। यदि चित्र न हो तो स्वास्तिक बनाकर इन पांचों वस्तुओं को अर्पित करें। इस दिन भगवान धनवंतरि की पूजा अत्यंत ही फलदायी होती है।