अयोध्या। विवादित ढांचा ढहाए जाने की 26वीं बरसी पर भी अयोध्या में बृहस्पतिवार की सुबह रोज की तरह ही थी। भोर में हनुमानगढ़ी समेत विभिन्न मठ-मंदिरों से सैकड़ों साधु-संतों ने सरयू में डुबकी लगाई और तिलक लगा कर पूजा-अर्चना की। छात्र-छात्राएं बेखौफ स्कूल जाती नजर आईं। मदरसे में पढ़ने जा रहे टेढ़ीबाजार के पास मिले मो. शाकिर, मो. अब्दुल्ला, मो. नुमान बोले-हम सब बहराइच के रहने वाले हैं।
आईटीआई के पास रहते हैं, वहीं मदरसे में पढ़ते हैं। माहौल बहुत खुशगवार है, बस पुलिस की गाड़ियां और कुछ रोक-टोक है। अयोध्या एकेडमी में पढ़ने जा रहीं कक्षा पांच की अन्नू और वैशाली बोलीं, हम सीओ कॉलोनी स्थित घर से स्कूल जा रहे हैं। घर वाले मना कर रहे थे, लेकिन सर ने कहा आना, कोई बात नहीं है।
हनुमानगढ़ी के पास आगरा से आए समर्थ व सागर मिले, बोले- बाइक पर तिरंगा लगाकर हम लोग घूमने निकले हैं। तीन दिन से अयोध्या में हैं। अभी बैरिकेडिंग देखकर पुलिस वाले से पूछा तो बोला छह दिसंबर है।
बाबरी मस्जिद के पक्षकार इकबाल के घर के पास युवकों का हुजूम दिखा। इसमें शामिल बृजेश, सत्येंद्र, दीनदयाल साहनी, दुर्गेश साहनी कहते हैं कि महाराजगंज से आए हैं। सेना में भर्ती दौड़ तो शुक्रवार को है। लेकिन एक दिन पहले यह देेखने आए हैं कि छह दिसंबर कैसा होता है।
अयोध्या के भीतरी इलाकों में पुलिस के सायरन और फोर्स के बूटों की आवाज लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी में दखल दे रही थी। तुलसी उद्यान के पास नवाबगंज गोंडा से ट्यूशन पढ़कर लौट रहीं बीएससी की छात्रा दो सहेलियां सबा सबरीन और रिया शर्मा बोलीं, छह दिसंबर को लेकर खौफ और संशय होता तो इतनी सुबह अयोध्या कैसे आतीं? बैरिकेडिंग के चलते दो किलोमीटर पैदल चलने पर टेंपो मिलेगा।
हनुमानगढ़ी से रामजन्मभूमि मार्ग पर पश्चिम बंगाल से आए श्रद्धालुओं का जत्था मिला। तारक घोष, बंटी सिंह, श्रीराम सिंह, कोठारी, चंदन गुप्ता बोले-हम हर साल शौर्य दिवस पर अयोध्या आते हैं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही एक दिन राम मंदिर बनाएंगे। सरयू घाट पर बंदिशों का असर नजर आया। बैरिकेडिंग से श्रृंगारहाट की करीब सौ दुकानें बंद थीं।
दुकान के पास खड़े गोपाल और रामजी गुप्ता कहते हैं कि जब पुलिस ने रास्ता ही बंद कर दिया तो दुकान खोलने का क्या फायदा। पहले ऐसे नहीं होता था। तीर्थ पुरोहित राम आधार पांडेय व रामनाथ पांडेय बोले, इस बार पता नहीं कौन अफसर आ गया है, इतनी बैरिकेडिंग और रोक-टोक कई साल तक नहीं दिखी। तुलसी कन्या इंटर कॉलेज की सैकड़ों छात्राएं लौटती दिखीं। छात्रा अनुपमा, अंजू और सावित्री ने कहा कि बंदिशें देखकर मैम ने कहा घर चले जाओ।
मदरसा मुस्लिम यतीमखाना बड़ी बुआ रोज की तरह खुला हुआ है। अंदर पढ़ाई हो रही है, बाहर दर्जनों युवा खेल में मस्त हैं। चौका लगाने वाले रेडीमेड कारोबारी मोहम्मद सारिक हंसकर कहते हैं कि हमें गम से क्या मतलब...।
साथ खेल रहे देवकाली के दुकानदार आरिफ, नियावां के फैजान अंसारी, टकसाल के मोनिस अंसारी समेत जाकिर व साबिर भी यौमे गम और बंदी को लेकर हंसते हुए कहते हैं कि बृहस्पतिवार बंदी का दिन है, हम सब दुकानदार हैं, बंदी के दिन यहीं खेलने आते हैं। अयोध्या में गम और शौर्य मनाने वाले सियासी हैं, हमें क्या लेनादेना। इनकी वजह से ही हमारा बिजनेस तबाह हो रहा है।
सुबह कुछ इलाकों में दिखीं बंदिशें, दोपहर बाद हट गए बैरियर
सुबह सात बजे अचानक पुलिस की बंदिशों ने माहौल तल्ख कर दिया। मुख्य मार्गों पर बैरियर लगाकर वाहनों का प्रवेश रोक दिया गया। इसका असर दर्शन-पूजन से लेकर स्कूल-कॉलेज, समेत हर चीज पर पड़ा। लोगों का गुस्सा बढ़ने लगा तो एसपी सिटी अनिल सिंह सिसोदिया ने पहुंचकर मोहबरा मार्ग खुलवाया। हालांकि दिन ढलते ही हालात सामान्य हो गए। पुलिस का कहना है कि उसे कहीं से प्रदर्शन की सूचना मिली थी जिसके बाद कुछ इलाकों में बैरियर लगाने पड़े।
हर छक्के-चौके पर चहक रहे थे मंजर मेंहदी
साकेत पीजी कॉलेज में पीएसी का डेरा होने से क्लास तो बंद है, मगर मैदान में अंतर महाविद्यालयीय क्रिकेट प्रतियोगिता बृहस्पतिवार को शुरू हुई। सरयू महाविद्यालय करनैलगंज और विश्वविद्यालय परिसर की टीमों का मुकाबला चल रहा था। कमेंट्री कर रहे मंजर मेंहदी की आवाज गूंज रही थी। मौसम खुशगवार है...उत्साह और खुशी का माहौल है। तभी चौका लगते ही वे खुशी से चहक उठे।
हिंदू-मुस्लिम एक साथ आईटीआई में कर रहे थे पढ़ाई
आईटीआई अयोध्या रोज की तरह खुला था। यहां का दृश्य हिंदू-मुस्लिम की बात करने वाले और शौर्य और यौमे गम के नाम पर माहौल खराब करने वालों से बिल्कुल इतर था। युवा पीढ़ी में खौफ का नामोनिशान तक नहीं था। फतेहगंज से आई इफत इदरीशी मशीनों के बीच बैठकर पढ़ाई कर रही थीं। साथ में नियावां से आयी पल्लवी मौर्या, मसौधा से आई अर्चना सिंह समेत अन्य छात्रों के साथ बेहद खुश थीं। बोली कैसा, छह दिसंबर घर वालों ने न याद दिलाई और न ही स्कूल आने से रोका।
मोदी में दम है, दिखाएंगे जरूर
श्रीराम मंदिर न्यास की कार्यशाला में भक्तों की भीड़ थी। राम मंदिर मॉडल बाहर रखा था। विनोद कुमार बोले, इसको पालिस करने के लिए बाहर निकाला गया है। पांच दिन से काम चल रहा है। गुजरात से आई भक्तों की टोली में शामिल प्रभु लाल, राघव, कुंवर भाई ने कहा कि मोदी में दम है दिखाएंगे जरूर, मंदिर बनेगा। रजनीकांत सोमपुरा शिला की तराशी में जुटे थे, बोले, मंदिर बनना शुरू होगा तो इसकी सफाई में भी वक्त लगेगा।
कोर्ट का आदेश पलट सकता है तो राममंदिर क्यों नहीं बन सकता
सरयू घाट पर भीड़ कम थी, मगर राम मंदिर को लेकर आक्रोश दिखा। छह दिसंबर की बात आते ही वृंदावन बराहघाट के महंत श्रीराम दास त्यागी भड़क उठे। बोले-मोदी एससी-एसटी का कानून बनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का आदेश पलट सकते हैं तो राम मंदिर क्यों नहीं बन सकता। महंत नारायण दास त्यागी समर्थन करते हुए कहते हैं कि मोदी चाहते ही नहीं। उत्तराखंड से आए महंत श्रीराम शिरोमणि दास फलाहारी बोले कि ऐसा नहीं है नरेंद्र मोदी ही मंदिर बनाएंगे। राज्यसभा में बहुमत न होने से देरी हो रही है। तभी एक युवा साधु ने गुस्से में कहा अब कब बनेगा, महापौर, विधायक, सांसद से लेकर राष्ट्रपति तक भाजपा के हैं।
वह शौर्य दिवस मनाना छोड़ दें तो हम यौम-ए- गम: इकबाल
बाबरी मस्जिद के पक्षकार इकबाल अंसारी ने कहा कि मुसलमान तो कह ही रहा है कि कोर्ट का फैसला मानेंगे। कोर्ट देर कर रहा है। हमने जल्द सुनवाई की मांग को लेकर हिंदू पक्षकार के साथ मिलकर राष्ट्रपति को ज्ञापन दिया है। यौम-ए-गम यदि मुसलमान मनाते हैं तो शौर्य दिवस मनाने वालों से पूछा जाना चाहिए कि वे कब तक मनाएंगे। वह शौर्य दिवस मनाना बंद कर दें तो हम भी बंद कर देंगे। कहा कि मैं न यौम-एगम में शामिल हूं, न ही शौर्य दिवस में। यह तो नेताओं की परंपरा है। हमारी एक ही मांग यह झगड़ा खत्म होना चाहिए।
उधर, बाबरी मस्जिद मामले के पक्षकार इकबाल अंसारी के घर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के जफरयाब जिलानी के प्रतिनिधि के रूप में सिद्धार्थ सिंह सुबह ही पहुंच गए थे। उन्होंने कहा कि मामला कोर्ट में है। सभी चाहते हैं कि जल्दी हल हो जाए। कोर्ट के निर्णय की प्रतीक्षा सभी कर रहे हैं। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने निर्णय लिया था जिसके बाद रोज सुनवाई शुरू हुई जिसकी वजह से एक निर्णय आया। वर्तमान केंद्र सरकार को भी उन्हीं की तरह ही निर्णय लेकर मुकदमे का निस्तारण कराना चाहिए।
आडवाणी को नहीं बनने दिया राष्ट्रपति : हाजी महबूब
बाबरी मस्जिद के पक्षकार हाजी महबूब के घर पर यौम-ए-गम को लेकर कार्यक्रम चल रहा था। बाबरी मस्जिद ढहाने वालों के खिलाफ जोशीली तकरीरें हो रहीं थीं। लोग गम और गुस्सा जता रहे थे। इसी बीच हाजी महबूब ने कमरे के अंदर आकर बात शुरू की। कहा कि बाबरी मस्जिद को ढहाने वाले लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमाभारती को सजा दिलवाकर रहूंगा। सीबीआई केस वापस लेने की तैयारी में थी, लेकिन मेरी रिट पर सुनवाई चल रही है। मैंने आडवाणी को राष्ट्रपति नहीं बनने दिया। कहा कि सुप्रीम कोर्ट ही मंदिर-मस्जिद विवाद निपटाने का अंतिम जरिया दिख रही है। हम चाहते हैं कि सुलह-समझौते की ईमानदारी से कोशिश हो। तमाम लोग इस मकसद से आते हैं, लेकिन श्री श्री की कोशिश ही ईमानदार दिखती है। अयोध्या के मुसलमान नहीं चाहते कि राम मंदिर न बने।