सरकार की मंशा अच्छा व सरल टैक्स बने जीएसटी : शुक्ल
अयोध्या। जीएसटी लागू होने के बाद शुरूआती दौर में कुछ समस्याएं थीं। जिसे जीएसटी काउंसिल ने समझा और बाद में इसे सरल करने का काम किया गया। सरकार की मंशा है कि जीएसटी अच्छा और सरल टैक्स बने।
हम व्यापारियों के हित को ध्यान में रखते हुए जीएसटी पर काम कर रहे हैं। हाल ही में जीएसटी के स्लैब में किए गए बदलाव इसके उदाहरण हैं। उक्त बातें केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री शिवप्रताप शुक्ल ने कही।
वे अयोध्या के मानस भवन में आयोजित यूपी टैक्स बार एसोसिएशन की कार्यकारिणी सभा एवं जीएसटी सेमिनार को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। कहा कि लोग सरकार पर सवाल उठाते हैं लेकिन बावजूद इसके 1.2 जीडीपी यह दर्शाती है कि स्थिरता कायम है।
रिटायर्ड आईआरएस अधिकारी शफीक खान ने कहा कि जीएसटी के प्रावधानों को किस तरह लागू किया जाए इस पर विचार करने की जरूरत है। जिस तरह टैक्स वसूला जा रहा है वह गलत है।
गाजियाबाद के अधिवक्ता डीके गांधी ने कहा कि कानून बनाते समय विवादों पर विचार नहीं किया गया। ओटीपी प्रक्रिया को भी सरल बनाए जाने की आवश्यकता है।
यूपी टैक्स बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष बीएन राय ने कहा कि सिस्टम, पोर्टल की विफलता को दोष देने के बजाए सारा दोष व्यापारियों पर मढ़ दिया जाता है। कहा कि एडवोकेट को पोर्टल पर अलग विंडो प्रदान की जाए।
संगठन के जिलाध्यक्ष अरविंद कुमार गुप्ता, अधिवक्ता शुभम अग्रवाल ने भी जीएसटी की विसंगतियों पर मंत्री का ध्यानाकर्षण किया। संचालन आनंद सिंहल ने किया।
सेमिनार में विधायक वेद प्रकाश गुप्ता, डॉ. चंद्र प्रकाश त्रिपाठी, अभिनव योगेश सक्सेना, विक्रम चावला, सौरभ सिंह गहलौत, एडिशनल कमिश्नर विवेक कुमार समेत विभिन्न जिलों के करीब 300 अधिवक्ताओं ने सेमिनार में शिरकत की।
केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री शिवप्रताप शुक्ला ने पत्रकारों से वार्ता करते हुए कहा कि देश की संसद में सभी राजनैतिक दलों ने एससीएसटी कानून को पास किया, कोई अकेले नहीं किया गया है।
अगर आज कांग्रेस कहती है कि यह हमारी जींस में हैं तो यह उस समय क्यों नहीं था जब सभी लोग मिलकर बीजेपी के साथ खडे़े हो रहे थे। राममंदिर के सवाल पर कहा कि राममंदिर को कभी राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाया था।
यह पहले भी हम लोगों का कहना था कि कोर्ट का फैसला या आपसी सहमति से मंदिर का निर्माण किया जाएगा। संतों में कोई नाराजगी है तो उसको दूर कर लिया जाएगा।
उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल ने वस्तु एवं सेवा कर के व्यवहारिक परिचालन में आ रही समस्याओं को भारत सरकार के वित्त राज्य मंत्री शिव प्रताप शुक्ल के समक्ष रखा।
नगर अध्यक्ष चंद्र प्रकाश गुप्ता ने कहा कि कंपोजिशन स्कीम के तहत निर्माता एवं फुटकर विक्रेता को एक प्रतिशत कर देना होगा, जो कि उचित नहीं है। अगर व्यापारी से रिटर्न दाखिल करने में कोई गलती हो गयी है तो उसमें सुधार करने का कोई प्रावधान नही है।
सीए मनीष अग्रवाल ने व्यापारियों को विभागीय स्तर पर आ रही तकनीकी दिक्कतों, पेनाल्टी की रकम टैक्स से ज्यादा होने व जीएसटी पोर्टल पर शिकायतों का निस्तारण न होने की समस्या मंत्री को बताया।
व्यापारी नेता आनंद अग्रहरी, नरेश अग्रवाल, सरदार हरचरण सिंह, संजय पराग, गिरधारी चावला, ज्ञान केसरवानी ने व्यापारिक समस्याओं को रखा। राज्यमंत्री ने कहा कि सरकार सदैव व्यापारियों के हित एवं सम्मान के लिए तत्पर है।