फूलों से इत्र व अगरबत्ती बनाने की होगी पढ़ाई
फैजाबाद। रामनगरी के मंदिरों में चढ़ाए जाने वाले फूल अब रोजगार का साधन बनने जा रहे हैं। इसके लिए बुधवार को अवध विश्वविद्यालय व सुगंध एवं सुरस विकास केंद्र कन्नौज (एफएफडीसी) के साथ ऐतिहासिक एमओयू साइन किया गया। विश्वविद्यालय व एफएफडीसी कन्नौज मिलकर विभिन्न कोर्सेज शुरू करेगी। इन कोर्सेज के जरिए मार्केटिंग की भी जानकारी दी जाएगी। रिसर्च के लिए शोधार्थी यहां दूर-दराज से आएंगे।
अवध विश्वविद्यालय और सुगंध एवं सुरस विकास केंद्र के मध्य हस्ताक्षरित किए गए इस एमओयू में प्रावधान है कि दोनों सम्मिलित रुप से अयोध्या के मंदिरों से निकले फूलों के माध्यम से इत्र, अगरबत्ती व अन्य सुगंधित पदार्थों को विकसित करने पर शोध करेंगे। इसके औद्योगिक उत्पादन के संबंध में एक दूसरे के साथ मिलकर कार्य करेंगे। एफएफडीसी की ओर से निदेशक शक्ति विनय शुक्ला ने बुधवार को अवध विश्वविद्यालय के साथ करार पर हस्ताक्षर किया। अवध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मनोज दीक्षित ने बताया कि अयोध्या के 10 हजार से ज्यादा छोटे-बड़े मंदिर और धार्मिक स्थलों में रोजाना फूल चढ़ाए जातें हैं। इन फूल-पत्तियों से उत्पन्न होने वाले कचरे के निस्तारण की समुचित व्यवस्था न होने से इन्हें सरयू नदी में फेंक दिया जाता है। जिसकी वजह से सरयू में प्रदूषण भी बढ़ रहा है। बताया कि एफएफडीसी कन्नौज से करार हो गया है। अब इन कचरों को रीसाइक्लिंग कर सुगंधित इत्र, अगरबत्ती, हवन सामग्री आदि बनाई जाएगी। जो कचरा बचता है उससे बायो गैस, खाद बनाने में उपयोग किया जाएगा। विवि के पर्यावरण विज्ञान के विभागाध्यक्ष प्रो. जसवंत सिंह ने बताया कि इस योजना से लांग टर्म फायदा मिलेगा। अयोध्या-फैजाबाद धर्म की नगरी है, इसलिए यहां पर वृहद स्तर पर उपयोग में आने वाले फूलों से इत्र बनाने हेतु तकनीकी विकास पर भी कार्य करने के नए अवसर प्राप्त होंगें। विवि के मीडिया प्रभारी डॉ. एसएन शुक्ला ने बताया कि इस अवसर पर एफएफडीसी के निदेशक डॉ. शक्ति विनय शुक्ला द्वारा सुगंध उद्योग आजीविका तथा व्यवसाय विषय पर एक विशिष्ट व्याख्यान भी दिया गया।
शॉर्ट और लांग टर्म के कोर्स के साथ शोध करेंगे छात्र
अवध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मनोज दीक्षित ने बताया कि अवध विश्वविद्यालय और एफएफडीसी कन्नौज मिलकर विभिन्न कोर्सेज शुरू करेगी। इसमें लांग टर्म व शॉर्ट टर्म कोर्स शामिल होंगे। डिप्लोमा कोर्स भी शुरू किए जाएंगे। इन कोर्सेज के जरिए मार्केटिंग की भी जानकारी दी जाएगी। कोर्सेज में छात्र-छात्राओं को किताबी ज्ञान की घुट्टी पिलाई जाएगी। प्रैक्टिकल, लैब और फील्ड वर्क भी शामिल होगा। इसके लिए शहर के फूल विशेषज्ञों की भी मदद ली जाएगी। इस अभियान के तहत रिसर्च छात्रों को जोड़ा जाएगा। रिसर्च के लिए शोधार्थी यहां दूर-दराज से आएंगे।
मंदिरों में चढ़ाए जाते प्रतिदिन 10.15 क्विंटल फूल
अयोध्या में 10 हजार से ज्यादा मंदिर हैं, जहां प्रतिदिन 10.15 क्विंटल फूल चढ़ाए जाते हैं। इन फूलों से लगभग इतना ही कूड़ा हर रोज पैदा होता है, जिसका निस्तारण भी किसी चुनौती से कम नहीं है। अब इससे इत्र, अगरबत्ती और सुगंधित हवन सामग्री बनाए की कवायद धरातल पर उतरी तो काफी लाभ होगा। अवध यूनिवर्सिटी के कुलपति ने बताया कि शीघ्र ही एक प्रस्ताव तैयार कर सरकार को व शोध के लिए सहायता करने वाली एजेंसियों को सौंपा जाएगा। समझौता पत्र हस्ताक्षर हो जाने के बाद विवि एवं आस-पास के शोधार्थियों और उद्यमियों के लिए नए मार्ग प्रशस्त होंगे।
एफएफडीसी का दौरा करेंगे विश्वविद्यालय के छात्र
अवध विश्वविद्यालय के कुलपति के मुताबिक इस योजना के पहले चरण में एमओयू हस्ताक्षर कर लिया गया है। दूसरे चरण में अवध विश्वविद्यालय की एक टीम एफएफडीसी का दौरा करेगी जिसमें विश्वविद्यालय के शोधार्थी छात्र भी शामिल होंगे। जो वे फूलाें के कचरे से इत्र, अगरबत्ती और सुगंधित हवन सामग्री बनाने की जानकारी प्राप्त करेंगे। बताया कि समझौते के पश्चात कन्नौज के सुंगध विकास केन्द्र द्वारा इस प्रयोजन हेतु तकनीक एवं प्रशिक्षण की उपलब्धता सुलभ हो सकेगी। एफएफडीसी के निदेशक डॉ. शुक्ला ने कहा कि अयोध्या के मंदिरों से निकलने वाले फूलों से इत्र एवं अन्य सुगंधित पदार्थ बनाये जाने की परियोजना पर उनके केंद्र द्वारा समस्त सुविधाएं व तकनीक उपलब्ध कराई जाएगी।