फैजाबाद। नरेंद्र देव कृषि विश्वविद्यालय में बीते शुक्रवार को नवागत अधिष्ठाता डॉ. वीके सिंह पर भ्रष्टाचार के विभिन्न आरोपों का पुलिंदा पूर्व अधिष्ठाता डॉ. हरनाम सिंह ने राज्यपाल को भेजकर उनके पदभार ग्रहण करने पर आपत्ति जताई है। भेजे शिकायती पत्र में गायों की खरीद में घपले व गबन के अन्य आरोप लगाए गए हैं।
मालूम हो कि विश्वविद्यालय में पिछले कुछ दिनों से कुलपति प्रो अख्तर हसीब का उनके अधीनस्थ कर्मचारियों से खींचतान चल रही है।
जिसको लेकर अपने कार्यकाल समाप्ति से पूर्व कुलपति ने प्रेसवार्ता भी की थी, लेकिन उनका कार्यकाल राजभवन से बढ़ने के बाद उन्होंने शुक्रवार को अधिष्ठाता डॉ. हरनाम सिंह को उनके पद से हटा कर चिकित्सा विज्ञान एवं पशुपालन के वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. वीके सिंह को अधिष्ठाता का कार्यभार सौंपा।
डॉ. हरनाम सिंह ने शुक्रवार को डॉ. वीके सिंह पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाते हुए राज्यपाल को पत्र भेजकर उनको अधिष्ठाता का कार्यभार सौंपने पर आपत्ति जताई है। पत्र में उल्लेख है कि डॉ. वीके सिंह द्वारा पूर्व में किए गए भ्रष्टाचार, गबन की जांच व धन वसूली के लिए कुलपति डॉ. अख्तर हसीब से कई बार अनुरोध किया गया।
लेकिन उनके विरुद्ध कार्रवाई करने के बजाय उन्हें प्रोत्साहित करते हुए अधिष्ठाता का कार्यभार सौंप दिया गया। पत्र में उल्लेख है कि डॉ. वीके सिंह ने वर्ष 2009 में गंगातीरी स्वदेशी गायों को क्रय करने के लिए 50 हजार का अग्रिम आहरण किया। गायों व बछड़ों की मनमाने ढंग से खरीद की गई और स्वयं के द्वारा रसीद भी बनाई गई।
इसके अलावा वीके सिंह ने कालिंदी एवं वरुणा छात्रावासों के अधीक्षक रहने के दौरान लगभग 11 लाख रुपये निजी कार्य के लिए निकाल लिया। तत्कालीन कुलपति डॉ. कुरील ने छात्रावास मामले में नौ लाख रुपये की धनराशि डॉ. वीके सिंह से जमा कराई, फिर भी करीब 1 लाख 93 हजार जमा किया जाना शेष है।
इन तमाम आरोपों का निराकरण होने से पूर्व कुलपति ने डॉ. वीके सिंह के खिलाफ कार्रवाई के बजाय उन्हें अधिष्ठाता का पद सौंप दिया। वहीं अधिष्ठाता डॉ. वीके सिंह ने सेवा नियमावली से बंधे होने का हवाला देते हुए इस बारे में कुछ भी कहने से इन्कार किया है और कहा कि आवश्यकता पड़ने पर विश्वविद्यालय प्रशासन को स्पष्टीकरण दिया जाएगा।