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13 सौ शिक्षकों को नहीं मिल रही पगार

Tue, 18 Aug 2015 10:50 PM IST
फैजाबाद/अमर उजाला ब्यूरो
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विभागीय लापरवाही का नतीजा शिक्षामित्र से बने शिक्षकों को भुगतना पड़ रहा है क्योंकि बगैर सत्यापन हुए उन्हें वेतन भुगतान नहीं हो सकता है।
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जिले में प्रथम चरण में 797 शिक्षामित्रों का शिक्षक पद पर समायोजन एक अगस्त 2014 को हुआ। इसमें से ज्यादातर शिक्षकों के अभिलेखों का सत्यापन कार्य पूरा हो चुका है और वेतन भी दिया जा रहा है।

लेकिन जिनकी डिग्री संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी की है। उन लोगों का अभी सत्यापन नहीं हो पाया है। ऐसे लोगों की तादात तकरीबन सौ बताई जा रही है।
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रुदौली के प्राथमिक विद्यालय बहरास की कमलेश कुमार, हैरिंग्टनगंज के प्राथमिक विद्यालय बंसवारखुद के वेदप्रकाश, मवई के प्राथमिक विद्यालय हंसराजपुर के शिक्षक अजय कुमार यादव और प्राथमिक विद्यालय शेरपुर के शिक्षक सुखदेव की डिग्री संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से है।

इसलिए ये अभी तक वेतन से वंचित है। इन्हें पढ़ाते हुए एक वर्ष हो गया लेकिन वेतन नहीं मिला। दूसरे चरण में 1200 शिक्षामित्रों को शिक्षक पद पर समायोजित किया गया।

एक मई से ये सभी शिक्षक जिले के विभिन्न शिक्षा क्षेत्रों में पढ़ा रहे हैं। लेकिन इनके शैक्षिक अभिलेखों का सत्यापन कार्य अधूरा होने के कारण वेतन नहीं मिल पा रहा है। विभागीय नियम यह है कि नियुक्ति तिथि से 90 दिन के भीतर सत्यापन कार्य पूरा करा लिया जाना चाहिए लेकिन द्वितीय चरण में नियुक्त हुए अध्यापकों को पढ़ाते हुए 108 दिन हो गए फिर भी सत्यापन प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है।

बीकपुर के प्राथमिक विद्यालय परोमा की कमलेश कुमारी ने कहा कि सत्यापन नहीं होने के कारण आर्थिक दुश्वारियां बढ़ गई है। उधर दूरस्थ शिक्षा मित्र बीटीसी शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष धर्मपाल यादव ने मंगलवार को बीएसए को ज्ञापन देकर शपथपत्र के आधार पर वेतन भुगतान की मांग की है।

हैरिंग्टनगंज के प्राथमिक विद्यालय रनापुर की एकता सिंह ने कहा कि पढ़ाते हुए तीन माह से ज्यादा हो गए लेकिन सत्यापन कार्य में विभागीय लापरवाही के कारण हमें हमारा हक ही नहीं मिल पा रहा है।

अमानीगंज के प्राथमिक विद्यालय तुलापुर के अर्जुन भारती ने कहा कि जहां हमारी तैनाती है। वह विद्यालय घर से 70 किमी. दूर है। जिसके कारण प्रतिदिन दो सौ रुपया खर्च हो जाता है।

वेतन मिल नहीं रहा है। उधार लेकर काम चल रहा है। सत्यापन हो गया होता तो परेशानी खत्म हो जाती। हैरिंग्टनगंज के प्राथमिक विद्यालय पडऱीतारा की शर्मिला शर्मा ने कहा कि वेतन नहीं मिलने से परिवार में परेशानी बढ़ गई है।

लापरवाही किसी और की है और उसे शिक्षकों को भुगतना पड़ रहा है। हैरिंग्टनगंज के प्राथमिक विद्यालय जासरपुर की आराधना यादव ने कहा कि अप्रैल तक शिक्षामित्र होने के कारण 3500 रुपया मानदेय मिलता रहा। उसके बाद शिक्षक हो गई लेकिन वेतन नहीं मिला।  
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बीएसए पीके द्विवेदी ने बताया कि विभागीय स्तर से सत्यापन के लिए अभिलेखों को भेजा जा चुका है। उम्मीद है कि शीघ्र ही प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। सत्यापन के बाद ही वेतन भुगतान किया जाएगा।
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