फैजाबाद। जंग-ए-आजादी में शामिल स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों में बाबू रमानाथ मेहरोत्रा एक बड़ा नाम है। यह सिर्फ आजादी की लड़ाई में ही नहीं बल्कि देश में लगे आपातकाल के विरोध में भी सक्रिय रहे। आजादी की लड़ाई में कई बार जेल की यात्राएं कीं।
जिले के क्रांतिकारियों की ओर से किए गए रामपुर मेल डकैती कांड में इनकी प्रमुख भूमिका रही। इसके लिए उनको मात्र 14 वर्ष की उम्र में जेल जाना पड़ा। इनको गिरफ्तार करने के बाद ब्रिटिश हकूमत ने बाबू रमानाथ पर कई केस दर्ज कर काफी दिनों तक जेल में रखा।
यहां से छूटने के बाद वर्ष 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय भागीदारी की। अंग्रेजों के खिलाफ लखनऊ विश्वविद्यालय की ओर से हुए आंदोलन में उनको काफी चोटें आईं।
रमानाथ मेहरोत्रा का जन्म फैजाबाद (मौजूदा समय में अंबेडकरनगर) के चौधरी गिरजाप्रसाद के घर में वर्ष 1924 में हुआ था। वह अपने चाचा चंदू लाल मेहरोत्रा व अध्यापक सूरजनाथ पांडेय के संपर्क में आने के बाद हिंदुस्तान सोसलिस्ट रिपब्लिकन पार्टी के सदस्य बने।
यहां से उन्होंने आजादी की लड़ाई में लाल पर्चे बांटने से लेकर सरकारी कोष को लूटने की घटना को अंजाम दिया। रामपुर मेल डकैती कांड में उनको जेल जाना पड़ा। बनारस जेल से छूटने के बाद वह भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लेने लखनऊ चले गए। वहां डीएवी कॉलेज में प्रवेश लेने के बाद छात्र संघ चुनाव के अध्यक्ष चुने गए।
इस दौरान आइएनए दिवस में छात्र संघ के क्रांतिकारियों सथियों को रिहा कराने की मांग पर अंग्रेजों की लाठियां सहनी पड़ी। यहां से उनको मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। आजादी के बाद फैजाबाद में अमर शहीद अश्फाक उल्लाह खां के शहादत स्थल पर पहली बार फूल माला व नमन करने की प्रक्रिया इन्होंने ही शुरू की। साथ ही आपातकाल के दौरान मीसा में तीन माह बंद रहे।
रमानाथ के प्रयासों से स्थापित हुआ सेनानी भवन बदहाल
जिले में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के लिए रमानाथ मेहरोत्रा ने प्रशासन से कलेक्ट्रेट परिसर में सेनानी भवन स्थापित कराया। मौजूदा समय में यहां आचार्य नरेंद्र देव, डॉ. राम मनोहर लोहिया व रमानाथ मेहरोत्रा की मूतियां स्थापित हैं। खास बात यह है कि सेनानी भवन के रख-रखाव के लिए किसी भी प्रकार के बजट का इंतजाम नहीं है।
कभी-कभी उनके पुत्र मनोज मेहरोत्रा के प्रयास कुछ विभाग रंग-रोगन के कार्य को अंजाम दे देते हैं। मौजूदा समय में यहां बना फव्वारा बंद पड़ा है। टैंक का पानी इतना गंदा हो गया है कि अंदर पहुंचते ही बदबू आनी शुरू हो जाती है जबकि आसपास सभी जिले के वरिष्ठ अधिकारियों के ऑफिस हैं। सेनानी भवन का कामकाज देख रहे मनोज मेहरोत्रा बताते हैं कि इसके लिए पूरी तरह से जिले के एमपी व एमएलए जिम्मेदार हैं। कभी भी राजनीतिक दलों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया।