शनिवार को शाम लगभग तीन बजे देवोत्थानी एकादशी तिथि लगते ही शुरू हुई पंचकोसी परिक्रमा मार्ग श्रद्धालुओं के पग बढ़े तो श्रद्धालुओं का कारवां ऐसा जुटा कि धमनगरी रात व दिन मानव शृंखला की परिधि में घिरी रही। रविवार को करीब 10 से 12 लाख श्रद्धालुओं ने परिक्रमा की।
श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए बना नया परिक्रमा पथ परिक्रमार्थियों के लिए मुसीबत का सबब बन गया नंगे पांव परिक्रमार्थियों के पांव सड़क पर बिछी छर्रियों से छलनी हुए। चौदह कोसी परिक्रमा के बाद धर्मनगरी की पंचकोसी परिक्रमा देवोत्थानी एकादशी तिथि लगने के साथ शनिवार की शाम लगभग तीन बजे से शुरू हो गई थी।
समय बढ़ने के साथ परिक्रमा पथ पर लाखों की संख्या में परिक्रमार्थियों की भीड़ जुटी तो रात भर कारवां बढ़ता गया, जो रविवार की देर शाम जाकर ही रुका। लाखों की संख्या बूढ़े, जवान, बच्चे व महिलाओं ने नंगे पांव अयोध्या की पंचकोसी परिक्रमा की। राह की कठिनाइयों और चुभते कंकड़ों की परवाह किए बगैर राम-नाम की धुन गाते श्रद्धालु बढ़ते रहे।
महिलाएं ने बच्चों को पैदल तो कभी गोद में लेकर अपनी परिक्रमा पूरी की, तो बुजुर्ग परिक्रमार्थियों ने परिक्रमा पथ पर जगह-जगह विराम लेते हुए परिक्रमा पथ को नापते रहे। परिक्रमा का यह दौर शुरू हुआ तो रविवार की देर शाम तक मानव श्रंखला बदस्तूर कायम रही, जिनकी परिक्रमा पूरी हुई उन्होंने पवित्र भूमि का एक बार फिर से नमन किया और दर्शन-पूजन के लिए मठ-मंदिरों की ओर बढ़ चले।
दर्शन-पूजन के बाद ईख, शकरकंद, सिंघाड़ा व अन्य सामानों की खरीद की और वापस अपने घरों की ओर चल दिए। परिक्रमा व दर्शन पूजन के बाद घर वापसी के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ रेलवे स्टेशन , बस स्टेशन पर जमी रही। प्रशासन व पुलिस ने मेले के मद्देनजर सुरक्षा केचौकस इंतजाम किए थे। मेला क्षेत्र में श्रीराम अस्पताल से नयाघाट बंधा तिराहे से वाहनों का आवागमन पूर्णतया प्रतिबंधित रहा।
परिक्रमा के दौरान अयोध्या-फैजाबाद मार्ग पर धनुष चौराहे पर परिक्रमा के दौरान 24 घंटे वाहनों का आवागमन प्रतिबंधित कर परिक्रमार्थियों को रोक कर यातायात सुचारु बनाया जाता रहा। महत्वपूर्ण स्थलों पर सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई थी, लेकिन श्रद्धालुओं के लिए प्रशासन की व्यवस्थाएं नाकाफी रही।
कई स्थानों पर परिक्रमा के दौरान जाम की स्थिति बनी। एसपी सिटी आरएस गौतम ने बताया कि पंचकोसी परिक्रमा के आखिरी दिन रविवार को 10 से 12 लाख परिक्रमार्थियों ने परिक्रमा की और स्नान के बाद मठ मंदिरों में दर्शन कर अपने घरों को वापस होते रहे।