अयोध्या पर मौलिक शोध की आवश्यकता, युवा आएं आगे : प्रो. राना
फैजाबाद। डॉ. राम मनेाहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग की ओर से श्रीराम शोध पीठ में थिंकिग ऐरिया रिसर्च कांटेस्ट एंड च्वाइस क्रॉसिंग डिससिपनिरेली बाउंड्री विषय पर आयोजित व्याखान माला को संबोधित करते हुए अंतरराष्ट्रीय ख्यातिलब्ध विद्वान प्रो. राना पीबी सिंह ने कहा कि शोध के लिए विषयगत सीमा नहीं है। अयोध्या पर मौलिक शोध की आवश्यकता है, इसके लिए युवा आगे आएं।
बतौर मुख्य अतिथि उन्होंने कई उदाहरण देकर बताया कि किसी भी विषय का व्यक्ति किसी विषय पर शोध कर सकता है। उन्होंने अलवर्ट आइंसटाइन की चर्चा करते हुए कहा कि बहुत पढे़ लिखे नहीं होने के बावजूद अपने जिज्ञासु मस्तिष्क से उन्होंने जो शोध कार्य किए। वहां तक कोई नहीं पहुंच पाया। कहा कि हमारे देश के मनीषियों ने वेदों उपनिषदों और ब्राह्मणों इत्यादि ग्रंथों में जो बातें कहीं हैं उन पर शोध कर विश्व आश्चर्यचकित है। उन्होंने कहा कि बडे़ दुख की बात है कि अयोध्या पर मौलिक शोध की बड़ी कमी है। शोधार्थियों से आह्वान किया कि आगे आएं और इस चुनौती को स्वीकार करें। मुझसे जो सहयोग आपेक्षित हो उसके लिए मैं सहर्ष तैयार हूं। शोध के लिए सबसे पहले प्रश्न तैयार करना चाहिए कि आप चाहते क्या हैं? फिर उस दिशा में प्रमाणिक तथ्यों को एकत्रित करें, उनका तार्किक विश्लेषण करें। दो और दो चार होता है यह हमको बताया गया हमको सोचना चाहिए यह तीन और पांच क्यों नहीं हो सकता। इस तरह की जिज्ञासु दृष्टि रखना शोधार्थियों का प्रमुख लक्षण होना चाहिए, तभी आप सफल शोधार्थी हो सकते हैं।
कार्यक्रम के अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. मनोज दीक्षित ने अपने संबोधन में मुख्य अतिथि के बारे में बताया कि इनका व्याख्यान सुनना शोधार्थियों के लिए स्वर्णिम अवसर है, प्रो. राना अपने आप में चलती फिरती इनसाइक्लोपीडिया हैं। उन्होंने कहा कि आप लोग मूल शोध प्रमाणिकता के आधार पर कीजिए, जिससे समाज को एक नई ऊर्जा मिले। इसके लिए आपको संसाधनों की कमी नही होने दी जाएगी। कार्यक्रम में सर्वप्रथम मुख्य अतिथि, कुलपति व विभागाध्यक्ष प्रो. अजय प्रताप सिंह एवं अन्य शिक्षकों के द्वारा मां सरस्वती के चित्र पर माल्यापर्ण कर दीप प्रज्ज्वलन किया गया। अतिथियों के स्वागत के बाद विभागाध्यक्ष प्रो. अजय प्रताप सिंह ने कहा कि व्याख्यान से शोधार्थियोें को काफी कुछ सीखने को मिलेगा, जिससे आपको शोध में एक नयी दृष्टि मिलेगी।
इस कार्यक्रम में श्रीराम शोध पीठ के सहायक आचार्य डॉ. राज कुमार सिंह, डॉ. अंजनी सिंंह, सर्वेश कुमार, डॉ. संग्राम सिंह, डॉ. फारूख जमाल,, डॉ. शैलेन्द्र कुमार सहित बड़ी संख्या में शोधार्थी उपस्थित रहे।