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महिला अस्पताल में आठ बेड का बनेगा आईसीयू

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महिला अस्पताल में आठ बेड का बनेगा आईसीयू
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फैजाबाद। जिला महिला चिकित्सालय को शीघ्र ही शासन द्वारा एक बड़ी सौगात मिलने जा रही है। अस्पताल प्रबंधन की मांग पर शासन ने गंभीरावस्था में लोगों की जान बचाने के लिए आठ बेड का आईसीयू बनाने का निर्णय लिया है। अस्पताल की ओर से भेजे गए प्रस्ताव पर स्वीकृति करते हुए विभाग ने एक करोड़ तक का स्टीमेट अस्पताल से मांगा है। आईसीयू की सुविधा मिलने से गंभीर मरीजों के उपचार में व ऑपरेशन के बाद प्रसूताओं के इलाज में आसानी होगी।
जिला महिला अस्पताल में प्रसव के बाद झटका, सांस लेने में तकलीफ, आपरेशन के बाद नार्मल होने तक प्रसूताओं को समुचित देखभाल व आक्सीजन आपूर्ति आदि में दिक्कतों की वजह से रेफर होना पड़ता था। चाहकर भी डॉक्टर गंभीर रोगियों को वार्ड में रखकर इलाज की हिम्मत नहीं जुटा पाते थे। रोजाना ऐसे मरीजों को पास में स्थित जिला अस्पताल जाना पड़ता था। जहां पहले से ही भीड़ की वजह से दिक्कतें होती थी। अब शासन द्वारा जिला महिला अस्पताल में आठ बेड के आईसीयू के निर्माण को हरी झंडी मिलने से मरीजों को राहत मिलेगी। इसके लिए शासन से एक करोड़ की धनराशि का प्रावधान करते हुए अतिशीघ्र स्टीमेट बनाकर उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है।
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रेफरल सेंटर बन गया था महिला अस्पताल
जिला महिला अस्पताल में आए दिन इलाज में लापरवाही के मामले सामने आते हैं। प्रतिदिन अमूमन 50-60 प्रसूताओं को यहां भर्ती किया जाता है। इनमें से प्रतिदिन 18-20 मरीजों का प्रसव कराया जाता है। जबकि 5-10 महिलाओं को सीजर के तहत प्रसव होता है। ऑपरेशन के 24 से 48 घंटे तक प्रसूताओं को विशेष देखभाल की जरूरत होती है। प्रसव के बाद ब्रेन तक ऑक्सीजन सप्लाई ठीक ढंग से न होने या सांस संबंधी अन्य समस्याओं से ग्रसित महिलाओं के इलाज में अस्पताल प्रबंधन के पसीने छूटने लगते हैं। ऐसे में गंभीरावस्था में पहुंचते ही मरीजों को रेफर करना या निजी अस्पतालों की शरण में जाना मजबूरी हो गई थी। यहां हर माम जच्चा-बच्चा की मौत पर परिवारीजनों का डॉक्टर व स्टाफ से मारपीट आम बात हो गई थी। है। हाल यह है कि ऐसे में रेफर करने व टरकाने से शहर के निजी नर्सिंग होम में मरीजों की जेबें ढीली होती हैं या लखनऊ तक पहुंचते-पहुंचते मरीज दम तोड़ देता है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ अशोक कुमार गुप्ता ने इंजीनियर के साथ मौके का निरीक्षण भी किया गया है। उन्होंने बताया कि आईसीयू स्थापित होने से वेंटीलेटर आदि की व्यवस्था हो जाएगी, जिससे क्रिटिकल मरीजों को सांस संबंधी, झटका आने, ब्रेन को ऑक्सीजन आदि न मिल पाने का समुचित इलाज करके उन्हें बचाया जा सकता है।
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सीएमएस ने शासन से की थी आईसीयू की मांग
समस्याओं से निजात पाने के लिए जिला महिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. श्रीकांत शुक्ला ने शासन से 6 बेड के आईसीयू की मांग बीते माह की थी। मामले को गंभीरता से संज्ञान में लेते हुए शासन स्तर से 8 बेड के आईसीयू बनाने को हरी झंडी दी गई। शासन स्तर से आईसीयू संचालन के मानव संसाधन, मशीनों की स्थिति व बिल्डिंग के लिए उपकरण व फर्नीचर आदि की सूची भी दी गई और समस्त सामानों व मशीनों का स्टीमेट एक करोड़ तक बनाकर प्रेषित करने का निर्देश दिया गया है। सीएमएस ने बताया कि आईसीयू में बेहोशी के चिकित्सक, मेडिकल अफसर, स्टाफ नर्स व मानीटरिंग करने वाले की व्यवस्था की जाएगी। इसके अलावा यदि अस्पताल के चिकित्सक व स्टाफ नर्स अलग से वक्त निकालकर आईसीयू में सेवा देना चाहेंगे तो उन्हें अतिरिक्त पारिश्रमिक भी मिलेगा। बताया कि महिला अस्पताल का ओपीडी, पैथॉलोजी आदि नई बिल्डिंग में हस्तांतरित होने पर ओपीडी या सर्जिकल में से किसी एक बिल्डिंग को आईसीयू बनाए जाने का प्रावधान है।
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