अयोध्या। भारतीय मूल के एक अमेरिकी प्रोफेसर ने रामचरित मानस की वर्ड इंडेक्स (शब्द अनुक्रमणिका) तैयार की है। इसमें मानस के प्रत्येक शब्द का सुलभ व विस्तृत संदर्भ है, जो मानस के प्रसंग को समझने में मदद करता है। पुस्तक में संदर्भ पता करने की एक ऐसी अनूठी पद्धति का प्रयोग किया गया है, जिससे मानस के किसी भी संस्करण में शब्दों को आसानी से खोजा जा सके।
अयोध्या आकर रामलला का दर्शन करने वाले अमेरिकी प्रो. शिवप्रकाश के. अग्रवाल ने बुधवार को अमर उजाला से बातचीत की। बताया कि वे मूलत: अहमदाबाद के निवासी हैं। 1973 में अमेरिका चले गए, जहां से भारत आने-जाने का क्रम जारी रहा। 2001 से वे लगातार अमेरिका में ही रह रहे हैं, वहां हूस्टन यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं।
रामायण पर इंडेक्स तैयार करने के ख्याल के बारे में बताया कि घर में रामायण थी। पिता जी रामभक्त थे। 2008 में पिता का देहावसान हुआ, इसके बाद अचानक प्रेरणा हुई कि एक ऐसी रचना की जाए जो रामायण का सार समझाने में सहायक हो।
कहा कि आज के युग में संपूर्ण रामायण का पाठ युवा पीढ़ी के लिए थोड़ा कठिन होता है, इसलिए इस इंडेक्स में रामायण की मुख्य घटनाओं का संक्षेप में वर्णन किया है। उन्होंने यह भी कहा कि ग्रंथ की सत्यता पर विशेष ध्यान दिया गया है, कोई छेड़छाड़ नहीं है। इंडेक्स में मानस के 14 हजार 486 शब्दों का विस्तृत संदर्भ है।
प्रो. अग्रवाल बताते हैं कि रामायण की पहली इंडेक्स डॉ. सूर्यकांत ने 1937 में तुलसी रामायण शब्द सूची के नाम से लिखी थी। 1997 में डॉ. विनांत कैलबर्ट और डीफिलिप लटगेंडोर्फ ने रामचरितमानस शब्द अनुक्रमणिका प्रकाशित की। उस समय की तकनीकी सीमाओं के कारण पुस्तक में कई गलतियां रह गईं।
बताया कि उन्होंने दोनों लेखकों से संपर्क कर एक नये मानस शब्द अनुक्रमणिका की रचना करने पर चर्चा की, दोनों का पूर्ण सहयोग मिला। अयोध्या आए अमेरिका के हूस्टन यूनिवर्सिटी के प्रो. शिवप्रकाश के. अग्रवाल ने रामलला के दरबार में माथा टेका और अयोध्या शोध संस्थान भी गए। यहां संस्थान के निदेशक वाईपी सिंह ने उनका स्वागत सत्कार किया।
राम से सीखें मैनेजमेंट की कला
प्रो. शिवप्रकाश के. अग्रवाल कहते हैं कि मैनेजमेंट की कला सीखनी हो तो भगवान राम सबसे बड़े गुरु हैं। जीवन को कैसे मैनेज करना है, यह राम के चरित्र से सीखा जा सकता है। राम ने संपूर्ण समाज को जोड़ने की कला सिखाई। राम मैनेजमेंट के शिखर पुरुष थे। उन्होंने निषाद, केवट, वानर, भालू सभी को गले लगाया। राम का चरित्र अनुकरण कर ही आदर्श जीवन जीया जा सकता है।
शंाति पूर्वक हो अयोध्या विवाद का हल
प्रोफेसर अग्रवाल ने कहा कि अयोध्या आकर एक आध्यात्मिक ऊर्जा की प्राप्ति हुई है। कहा कि रामलला के दरबार में हाजिरी लगाते ही अद्भुत शांति का अनुभव हुआ। अब बस जरूरत है कि रामलला को अपना आवास मिल जाए। उन्होंने कहा कि अयोध्या मामले का समाधान शांतिपूर्ण ढंग से होना चाहिए।