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निर्मोही अखाड़ा की याचिका पर बिफरे पक्षकार व संत

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निर्मोही अखाड़ा की याचिका पर बिफरे पक्षकार व संत
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अयोध्या। बाबरी मस्जिद-श्रीरामजन्मभूमि विवाद में महत्वपूर्ण पक्षकार निर्मोही अखाड़ा की नई याचिका का हिंदू-मुस्लिम पक्षकारों समेत संत-धर्माचार्यों ने विरोध किया है।

उनका कहना है हाल में ही अयोध्या से बाहर मध्यस्थता की सुनवाई कराने के बाद अब नई याचिका से निर्मोही अखाड़ा की मामले के जल्द निस्तारण में बाधा डालने की कोशिश है।
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सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को दाखिल याचिका में केंद्र सरकार की ओर से अधिग्रहण की गई भूमि लौटाने पर सवाल उठाया गया है। निर्मोही अखाड़े के महंत दिनेंद्र दास ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में प्रमुख पक्षकार निर्मोही अखाड़ा है।

2.77 एकड़ भूमि भी निर्मोही अखाड़े की है। निर्मोही अखाड़े के छह मंदिर आज भी अधिगृहित परिसर में हैं। सरकार से निर्मोही अखाड़ा ने मुआवजा आज तक नही लिया है। श्री राम जन्मभूमि न्यास कुछ है नही है।

मुख्य पक्षकार निर्मोही अखाड़ा है, इसलिए अधि निर्मोही अखाड़ा को मिले। श्रीराम जन्म भूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास ने कहा कि मामला कोर्ट में विचाराधीन है। मामले के समाधान की उम्मीद भी जगी है।

ऐसे में नई-नई अर्जी देकर मामले को लटकाने का प्रयास किया जा रहा है। कहा कि भिन्नता में पराजय है और एकता में ही सफलता है। इसलिए राम मंदिर निर्माण के लिए सब को एकजुट होना होगा। हमें भूमि नहीं राम मंदिर चाहिए।

बाबरी मस्जिद के पक्षकार इकबाल अंसारी ने कहा कि अधिगृहित जमीनों का सरकार मुआवजा पहले ही दे चुकी है। अधिगृहित भूमि केंद्र सरकार की है। वो जिसको भी दे एतराज नहीं है।

झगड़ा सिर्फ जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद का है। मसले को डिले करने के लिये याचिका दाखिल की जाती है। ऐसी दरखास्त से कोर्ट का समय बर्बाद होता है। मुसलमान सिर्फ फैसला चाहता है।

श्रीरामजन्मभूमि न्यास के सदस्य अधिकारी राजकुमार दास ने कहा कि रामलला के दिव्य मंदिर के लिये विस्तार की जगह की जरूरत है। मंदिर निर्माण में सक्षम न्यास को ही जमीन मिलनी चाहिए। न्यास ने शुरू से ही राम मंदिर के लिए आंदोलन किया है।

सैकड़ों कारसेवकों ने बलिदान किया है। श्रीराम जन्म भूमि के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास ने कहा कि कि जहां तक हम जानते हैं निर्मोही अखाड़ा के नाम से कोई जमीन नहीं है। मामला मालिकाना हक का है, उसी पर निर्णय होना है।

निर्मोही अखाड़ा का राम चबूतरे पर कब्जा दिखाया गया है। इसके अलावा निर्मोही अखाड़ा का कुछ भी नहीं है। हम तो पहले भी कहते रहे हैं कि जितनी भी जमीन है वह राम लला की है न कि निर्मोही अखाड़ा, सरकार या विश्व हिंदू परिषद या राम जन्म भूमि न्यास की।

अब जल्द निर्णय होने की उम्मीद है तो इस में अड़ंगा लगाने के लिए यह सब किया जा रहा है। विहिप के प्रांतीय प्रवक्ता शरद शर्मा ने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर का निर्माण हो। इसके लिए लोगों ने अपने प्राणों की आहुति दी है।
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करोड़ों राम भक्तों का उद्देश्य और संकल्प मंदिर का निर्माण है, लेकिन कुछ लोग राष्ट्र के इस गंभीर विषय को उलझाये रखना चाहते हैं। 1993 में कांग्रेस की सरकार ने भगवान राम लला की भूमि सहित अनेक मठ मंदिरों और धर्मशाला का अधिग्रहण किया, न्यास को छोड़कर भू और भवन स्वामियों ने सरकार से मुआवजा प्राप्त कर लिया है।
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