मुफलिसी की चुनौतियों को मात देकर चमके मेधावी
अयोध्या। अंधेरे के खिलाफ संघर्ष में हमें हिम्मत नहीं खोनी है, क्योंकि जीत तो आखिर, उजाले की ही होनी है.. कवि जितेंद्र जौहर की कविता की ये पंक्तियां जिले के कुछ मेधावियों पर सटीक बैठती हैं।
यूपी बोर्ड के हाईस्कूल व इंटर मीडियट का परीक्षा परिणाम शनिवार को घोषित हुआ है। इसमें जिले के टॉप-5 में अपना नाम दर्ज कराने वाले कुछ मेधावियों के बुलंद इरादों के आगे तमाम विपरीत परिस्थितियां भी नत मस्तक हो गईं।
जिले के हाईस्कूल व इंटरमीडिएट के टॉप-5 में ही कई बच्चे ऐसे हैं जो गरीबी व तंगी की कोख से निकले हैं। कोई मजदूर का बेटा है तो कोई कमजोर किसान का। नई पीढ़ी को इन मेधावियों से सीख लेना चाहिए।
इंटरमीडिएट के टॉपर सूरज तिवारी पड़ोस के बस्ती जिले के चौरी सिकंदरपुर के दुबौली तिवारी का पुरवा के रहने वाले हैं। उनके पिता शिवपूजन खेती-बारी करके परिवार का भरण-पोषण करते हैं।
कमाई का जरिया सिर्फ छोटी सी खेती ही है। सूरज के मामा के लड़के राकेश तिवारी ने सूरज को एक कमरा किराए पर दिलाकर एसएसएसवी इंटर कॉलेज में दाखिला कराया। यहीं से उसके अधिकांश खर्च का वहन राकेश करता था।
सूरज ने अपनी सफलता का श्रेय भी राकेश को दिया है। हाईस्कूल की टॉपर साक्षी जायसवाल के पिता सुरेंद्र शहर के ब्रह्म बाबा के निकट एक दुकान चलाते हैं। उससे होने वाली छोटी आय से परिवार के भरण-पोषण के साथ तीन बच्चों को पढ़ाते हैं।
इंटर में दूसरा स्थान प्राप्त करने वाली ग्रामोदय इंटर कॉलेज की सना परवीन की कहानी सबसे जुदा है। नरियांवा गांव निवासी सना के पिता मोहम्मद शफीक मजदूरी करते हैं। माता हकीकुल निशा आशा संगिनी हैं।
बड़ी बहन सलमा एक निजी स्कूल में मामूली मानदेय पर पढ़ाती है। मोहम्मद शफीक के कंधे में सना की पढ़ाई के साथ-साथ सात सदस्यों के परिवार का भार भी है।
कम संसाधनों में कड़ी मेहनत से सना ने हाईस्कूल में भी जिले में दूसरा स्थान प्राप्त किया था, जिसे इस बार भी बरकरार रखा। हाईस्कूल में दूसरा स्थान पाने वाली प्रियांशी यादव शहर के मोदहा दक्षिणी की निवासी है।
उनके पिता राकेश यादव एक कपड़े की दुकान पर काम करते हैं और माता कमलेश होमगार्ड हैं। 92.5 प्रतिशत अंक पाकर हाईस्कूल में पांचवें स्थान पर रहे विवेक यादव तारुन शिक्षा क्षेत्र के बेलगरा मजरे बनघुसरा निवासी किसान बद्री प्रसाद यादव का पुत्र है।
मेहनत-मजदूरी करके बद्री ने बच्चों की पढ़ाई पर विशेष ध्यान दिया। बद्री प्रसाद थोड़ी-बहुत गन्ने की खेती करते हैं, उसी से बच्चों को पढ़ाते हैं, फिर भी खर्च नहीं चल पाता। विवेक के नाना बाकरगंज निवासी राजाराम यादव पढ़ाई में सहयोग करते हैं।
इंटरमीडिएट परीक्षा में जिले में टॉप पांचवें स्थान रही प्रमिला की मां शिवलली व पिता रामसुंदर प्रजापति मजदूरी करते हैं। तंगी के साथ जीवन जीते हुए प्रमिला ने पढ़ाई को हमेशा प्राथमिकता दी। कभी-कभी मां-बाप के साथ वह मजदूरी में भी सहयोग करती है।
हाईस्कूल में टॉप-5 में शामिल नागपाली के अनुराग वर्मा के पिता झुरई वर्मा राम की पैड़ी पर सिंचाई विभाग में चतुर्थ श्रेणी मेट के पद पर कार्यरत हैं। थोड़ी आय होने से परिवार का खर्च भी सकुशल चलाने में दिक्कत होती है।
चाचा राजेंद्र प्रसाद वर्मा घर पर रहकर खेती किसानी करके अनुराग को पढ़ा रहे हैं। इसी तरह शहर से लेकर देहात तक के अन्य मेधावियों ने भी उत्कृष्ट अंक पाकर तमाम यातनाओं व दिक्कतों को नतमस्तक कर दिया और नई पीढ़ियों के लिए मिसाल होगी।