अयोध्या। बिजली कर्मियों की हड़ताल से जिले में अब तक सौ करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हो गया है। सैकड़ों उद्योग धंधे ठप पड़ गए हैं और हजारों मजदूरों के हाथ रुक गए हैं। सभी बिजली व्यवस्था पटरी पर आने का इंतजार कर रहे हैं। उद्यमियों ने अफसरों से विद्युत आपूर्ति बहाली के लिए कहा लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो पाया। जिले में लगभग ढाई सौ उद्योग धंधे रजिस्टर्ड हैं। इतने ही उद्योग गांव-गिरांव में चल रहे हैं। इनमें फ्लोर मिल, कागज, पावर प्लांट, बैटरी, सीमेंट, प्लाई, चीनी, बेकरी, पान, ठंडे पेय सहित अन्य इंजीनियरिंग के उद्योग धंधे प्रमुख हैं। इसके साथ ही गांव में चक्की जैसे कुटीर और लघु उद्योग भी संचालित हो रहे हैं। इनमें ज्यादातर की निर्भरता बिजली पर है। कुछ ही उद्योग धंधे ऐसे हैं जो कुछ समय तक अपनी फैक्टरी जेनरेटर से चला सकते हैं लेकिन ज्यादातर बगैर बिजली आपूर्ति के नहीं चल सकते हैं।
बिजली आपूर्ति बंद होने से फैक्टरियां ही बंद नहीं हुई, मजदूरों के हाथ भी रुक गए हैं। वह पिछले दो दिन से बिजली आपूर्ति का इंतजार कर रहे हैं।
इंडियन इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के चैप्टर चेयरमैन सुरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि बिजली बंद होने से उद्योग बंद हो गए हैं। अब तक जिले में लगभग सौ करोड़ से ज्यादा का नुकसान हो चुका है। लोकल मजदूरों को करोड़ों रुपये का नुकसान हो चुका है। एडीएम प्रशासन और कमिश्नर से शिकायत की। उन्होंने पावर कॉर्पोरेशन के चीफ इंजीनियर से कहा लेकिन आपूर्ति बहाल नहीं हो पाई।
अपनी रफ्तार में चल रही दोनों चीनी मिलें
-जिले में दो चीनी मिले हैं। रौजागांव और केएम शुगर मिल मोतीनगर मसौधा। यह दोनों मिलें पूरी रफ्तार से चल रही हैं। इन पर बिजली कर्मियों की हड़ताल का प्रभाव नहीं पड़ा है। जिला गन्ना अधिकारी हुदा सिद्दीकी ने बताया कि चीनी मिलों के पास बिजली कनेक्शन है लेकिन वह अपरिहार्य स्थितियों के लिए। ये खोई (बगास) से चलने वाला पावर प्लांट है। इसीलिए इन पर फिलहाल कोई प्रभाव नहीं पड़ा है।