अयोध्या। रामलला की अचल मूर्ति को लेकर मंथन का दौर जारी है। रामसेवक पुरम में शनिवार को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने मूर्तिकारों के साथ बैठक की। सभी मूर्तिकारों ने रामलला के मूर्ति की अपनी-अपनी डिजाइन प्रस्तुत की। इसमें पद्मभूषण वासुदेव कामत की डिजाइन सबसे ज्यादा पसंद की गई। बैठक के बाद मूर्तिकारों ने अब तक आए सभी 11 पत्थरों की टेस्टिंग भी की है। शनिवार को रामनगरी में मूर्ति विशेषज्ञों का जमावड़ा हुआ। ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने इन मूर्तिकारों के साथ रामसेवकपुरम कार्यशाला में बैठक की। बैठक में विख्यात मूर्तिकार विश्वनाथ कामत, सुदर्शन साहू, विष्णु शर्मा, जयपुर के सत्यनारायण पांडेय, कर्नाटक के गणेश भट्ट व मनैया बी ने अपने-अपने चित्र ट्रस्ट के समक्ष प्रस्तुत किए। सभी ने कागज पर पेंसिल से रामलला की मूर्ति की डिजाइन (स्केच) बनाई थी।
ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने बताया कि प्रख्यात चित्रकार वासुदेव कामत का चित्र सबसे अच्छा लगा है। बाकी चित्र शास्त्र सम्मत नहीं लगे। हालांकि मूर्ति को लेकर अभी कोई निर्णय नहीं हो सका है। बताया कि कर्नाटक से पांच पत्थर आए हैँ। कर्नाटक के पत्थरों का रंग आसमानी नीला दिख रहा है, लेकिन मूर्ति विशेषज्ञों को डर है कि आगे चलकर पत्थर पूरा काला हो सकता है।
मूर्तिकारों ने जब इन पत्थरों पर पानी डाला तो इनका रंग काला हो गया। नेपाल के काली गंडकी नदी से आए शालिग्राम पत्थर पर छीनी-हथौड़ी चल नहीं सकती। ऐसे में अब राजस्थान आए मकराना संगमरमर का विकल्प बचा है। इस पत्थर की टेस्टिंग भी मूर्ति विशेषज्ञों ने की है। कहा कि अभी तक मूर्ति के लिए 11 पत्थरों को लेकर आपसी सहमति नहीं बन सकी है।
कोषाध्यक्ष ने बताया कि एक माह के भीतर जो पत्थर आ जाएंगे उन पर विचार किया जाएगा। इसके बाद आने वाले पत्थरों पर विचार नहीं किया जाएगा। बताया कि अभी उड़ीसा से पत्थर आने बाकी हैं। अभी तक कुल 11 पत्थर अयोध्या आ चुके हैं जिसमें नेपाल सहित कर्नाटक व राजस्थान के पत्थर हैं। बैठक में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी डॉ.अनिल मिश्र, महंत दिनेंद्र दास, विहिप के केंद्रीय मंत्री राजेंद्र सिंह पंकज, मंदिर निर्माण प्रभारी गोपालजी, शरद शर्मा सहित अन्य मौजूद रहे।
मूर्ति बनने में लगेंगे करीब 6 महीने
- ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया कि प्राण प्रतिष्ठा से पहले रामलला की अचल मूर्ति बन जाए ऐसी योजना है। मूर्ति का स्वरूप, डिजाइन, पत्थर फाइनल होने के बाद जब काम शुरू होगा तो मूर्ति बनने में कम से कम छह माह लग जाएंगे। ऐसे में यदि हम मई में अचल मूर्ति का काम शुरू करें तो अक्तूबर-नवंबर तक मूर्ति बनकर तैयार हो जाएगी। बताया कि वासुदेव कामत द्वारा पेश किया गया चित्र सबसे अच्छा है। इसमें थोड़ा परिवर्तन का सुझाव दिया गया है।
12 इंच के कमल दल पर खड़ी मुद्रा में होगी मूर्ति
- वासुदेव कामत ने बताया कि रामलला की अचल मूर्ति की कुल ऊंचाई 51 इंच होगी। यह मूर्ति 12 इंच ऊंची कमलदल पर विराजित की जाएगी। बताया कि सभी पत्थरों पर अभी विग्रह बनाए जाएंगें, फिर देखा जाएगा कि कौन सा विग्रह शास्त्र सम्मत है। जिस मूर्ति में बालसुलभ कोमलता झलकेगी उसी ही फाइनल किया जाएगा।