अयोध्या। सरकार परिषदीय स्कूलों को कॉन्वेंट की तर्ज पर हाईटेक करने के दावे जरूर कर रही है, लेकिन मूलभूत सुविधाएं भी नहीं हैं। बच्चे अभी भी टाटपट्टी पर बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं। प्राथमिक स्कूलों में अतिरिक्त मद न मिलने से कोई इंतजाम नहीं हो पा रहा है।
उधर, 149 जूनियर हाईस्कूल में करीब डेढ़ साल से 1.71 करोड़ रुपये मिलने के बाद भी बच्चे टाटपट्टी पर ही बैठ रहे हैं। इस धन से फर्नीचर आपूर्ति का पहले ठेका हुआ था, मगर घटिया सामग्री की आपूर्ति शुरू होते ही जांच के बाद ठेकेदार को ब्लैकलिस्टेड कर दिया गया। ठेकेदार के कोर्ट जाने से मामला अधर में लटका हुआ है। अब बीएसए ने शासन से गाइडलाइन मांगी है।
जिले में 1529 प्राथमिक व 566 उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं। बीते सत्र तक 1,90,933 छात्र-छात्राएं पंजीकृत थे। इनमें अधिकांश स्कूलों में बच्चों के बैठने के लिए टाटपट्टी की ही व्यवस्था है।
वहीं, उच्च प्राथमिक स्कूलों के बड़े बच्चों को टाटपट्टी पर बैठने में हो रही दिक्कतों को देखते हुए बीते वर्ष 149 उच्च प्राथमिक विद्यालयों के लगभग 7800 बच्चों के लिए फर्नीचर की व्यवस्था करने का निर्देश दिया गया।
4460 रुपये प्रति फर्नीचर के हिसाब से 1.71 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। लगभग 39 सौ रुपये प्रति फर्नीचर के हिसाब से एक करोड़ 59 लाख रुपये में कार्य का आवंटन हुआ।
कार्यदायी संस्था ने नगर क्षेत्र, सोहावल, पूरा, मया व मसौधा ब्लॉक क्षेत्र के स्कूलों में फर्नीचर आपूर्ति शुरू की। लेकिन अधिकारियों ने आपूर्ति किए जा रहे फर्नीचर का सत्यापन नहीं कराया।
मानक के विपरीत आपूर्ति हो रहे फर्नीचर की खबर अमर उजाला में प्रकाशित होने के बाद तत्कालीन जिलाधिकारी ने निर्धारित मानकों के संदर्भ में सत्यापन के लिए चार सदस्यीय समिति गठित की। समिति की आख्या में फर्नीचर अधोमानक मिले। बाद में विभाग ने तर्क दिया कि कार्यदायी संस्था ने आपूर्ति से पूर्व प्रत्येक ब्लॉक संसाधन केंद्र व बीएसए कार्यालय पर नमूना उपलब्ध नहीं कराया।
हालांकि, जांच में पता चला कि आपूर्ति किया गया फर्नीचर लोहे के एंगल के बजाय हॉलो पाइप पर है। प्रति डेक्स में 11.59 किग्रा वजन कम पाया गया। इसके बाद फर्नीचर आपूर्ति पर रोक लगाते हुए उसे वापस लेने का फरमान जारी किया गया।
बीते जुलाई में जिलाधिकारी अनुज कुमार झा की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में क्रयादेश के विपरीत फर्नीचर आपूर्ति का हवाला देते हुए उक्त फर्म को काली सूची में डालकर नए सिरे से निविदा निकालने का आदेश जारी किया गया। नए सिरे से निविदा प्रक्रिया प्रारंभ होते ही उक्त फर्म ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। इस तरह विभागीय खामियों की वजह से 1.71 करोड़ रुपये खाते में होते हुए भी नौनिहालों को फर्नीचर नसीब नहीं हो रही है।
कार्यदायी संस्था मानक विपरीत फर्नीचर आपूर्ति कर रही थी, जांच में साबित होने पर उसे ब्लैक लिस्टेड करके निविदा निकाली गई थी। इस बीच उक्त संस्था कोर्ट गई है। अग्रिम कार्रवाई के लिए निर्देश मांगा गया है।
-अमिता सिंह, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, अयोध्या