इटावा। जिले में आयोजित रोजगार मेलों के प्रति युवाओं का उत्साह लगातार कम होता दिखाई दे रहा है। शुक्रवार को जिला सेवायोजन कार्यालय में आयोजित रोजगार मेले में भी यही तस्वीर देखने को मिली। 2095 रिक्त पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया आयोजित की गई, लेकिन इसके सापेक्ष केवल 389 अभ्यर्थी ही साक्षात्कार के लिए पहुंचे। इनमें से 176 युवाओं को शॉर्टलिस्ट जॉब ऑफर मिला। कम वेतन और जिले से बाहर तैनाती की शर्तों को युवाओं की कम भागीदारी की बड़ी वजह माना जा रहा है।
केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर जिला सेवायोजन कार्यालय (मॉडल कॅरिअर सेंटर) इटावा के संयुक्त तत्वावधान में एक दिवसीय रोजगार मेला एवं कॅरिअर काउंसलिंग कार्यक्रम आयोजित किया गया। मेले में 12 निजी कंपनियों ने हिस्सा लिया और विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए। कार्यक्रम के दौरान अभ्यर्थियों को नेशनल कॅरिअर सर्विस पोर्टल, रोजगार संगम, सेवामित्र, सेवायोजन पोर्टल, विदेशों में रोजगार की संभावनाओं और सरकारी योजनाओं की जानकारी भी दी गई। रोजगार की तलाश में पहुंचे कई युवाओं ने बताया कि अधिकांश कंपनियां जिले से बाहर नौकरी दे रही थीं, जबकि वे स्थानीय स्तर पर रोजगार की उम्मीद लेकर आए थे। वेतनमान भी अपेक्षाकृत कम होने के कारण कई युवाओं ने नौकरी में रुचि नहीं दिखाई। मेले में सबसे अधिक 58 अभ्यर्थियों ने पुखराज हेल्थकेयर प्राइवेट लिमिटेड के लिए साक्षात्कार दिया, जिनमें से 30 का चयन किया गया। सिनोवा गेयर्स एंड ट्रांसमिशन प्राइवेट लिमिटेड ने 54 में से 24 अभ्यर्थियों को चुना। अतुल ऑटो लिमिटेड ने 32 में से 14, यूनो मिंडा लिमिटेड ने 27 में से 12 और एसआईएस सिक्योरिटी लिमिटेड ने 34 में से 15 अभ्यर्थियों को जॉब ऑफर दिया। इसके अलावा ग्लोबल सिक्योरिटी सर्विसेज ने 32 में से 14, एसडीवी एडुटेक प्राइवेट लिमिटेड ने 39 में से 17, भारतीय जीवन बीमा निगम ने 28 में से 12, एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस ने 37 में से 17 तथा सूर्याश सिक्योरिटी सर्विसेज ने 25 में से 11 अभ्यर्थियों का चयन किया। कुल मिलाकर 389 अभ्यर्थियों का साक्षात्कार लिया गया, जिनमें से 176 को शॉर्टलिस्ट जॉब ऑफर दिए गए। जिला सेवायोजन अधिकारी विकास मिश्रा ने बताया कि रोजगार मेले का उद्देश्य युवाओं को निजी क्षेत्र में उपलब्ध रोजगार अवसरों से जोड़ना और उन्हें कॅरिअर संबंधी जानकारी उपलब्ध कराना था। कार्यक्रम में मॉडल कॅरिअर सेंटर के यंग प्रोफेशनल दीपक कुमार सिंह समेत विभागीय कर्मचारी मौजूद रहे।
भरथना से आए दिव्यांग सतीश कुमार ने बताया कि ज्यादातर कंपनियां नोएडा, गुरुग्राम और गुजरात और अन्य शहरों में तैनाती दे रही हैं। 10 से 15 हजार रुपये वेतन में दूसरे शहर में रहना और खर्च निकालना मुश्किल है। ऐसे में नौकरी मिलने के बाद भी उसे स्वीकार करना आसान नहीं होता।
रोजगार मेले में पहुंचे शहर के इंजीनियरिंग कॉलेज मोहल्ला निवासी ऋतिक ने कहा कि निजी कंपनियों में लंबे कार्य घंटे और कम वेतन की वजह से युवा सोच-समझकर निर्णय ले रहे हैं। यदि जिले में ही रोजगार के अवसर मिलें तो अधिक संख्या में युवा ऐसे मेलों में भाग लेने के लिए आगे आएंगे।