इटावा/चकरनगर। बीहड़ के दुर्गम रास्तों और सरकारी उपेक्षा की मार झेल रहे कांयछी गांव के लिए यह सुखद खबर है। आजादी के सात दशक बीत जाने के बाद भी जिस गांव के लोग पक्की सड़क के लिए तरस रहे थे, अब वहां डामर की सड़क चमकेगी। अमर उजाला की ओर से ग्रामीणों के इस दर्द को प्रमुखता से उठाए जाने के बाद प्रशासन जागा और डीएम शुभ्रांत कुमार शुक्ल के प्रयासों से शासन ने चार करोड़ रुपये के बजट को स्वीकृति दे दी है।
मई माह से सड़क का निर्माण कार्य युद्धस्तर पर शुरू होगा। कांयछी गांव की इस विकराल समस्या को अमर उजाला ने कई बार प्रमुखता से प्रकाशित किया। बीहड़ की भौगोलिक चुनौतियों और ग्रामीणों की लाचारी को प्रमुखता से प्रकाशित किए जाने के बाद डीएम ने इसे गंभीरता से लिया। उनके निर्देश पर पीडब्ल्यूडी विभाग ने विशेष प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा था, जिसे अब मंजूरी मिल गई है।
बरसात में टापू बन जाता था गांव
चकरनगर तहसील का यह गांव अब तक बुनियादी सुविधाओं के लिए सिसक रहा था। कच्चे और दुर्गम रास्तों के कारण बरसात के दिनों में गांव का संपर्क मुख्य मार्ग से पूरी तरह कट जाता था। बीमारों और गर्भवती महिलाओं को चारपाई पर लादकर मुख्य मार्ग तक ले जाना यहां की कड़वी हकीकत थी। सड़क न होने का सीधा असर बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ रहा था।
डीएम शुभ्रांत कुमार शुक्ल ने बताया कि करीब छह माह के प्रयास के बाद सभी तरह की एनओसी जारी करा दी गई है। पीडब्ल्यूडी को जल्द सड़क का निर्माण शुरू कराने के आदेश दिए हैं। जल्द ही चकरनगर के क्षेत्र के लोगों को राहत मिल सकेगी।