सैफई। जिले के लोगों को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज 500 बेड के सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल की सौगात देंगे। वह पौने 12 बजे सैफई मेडिकल कॉलेज परिसर में अस्पताल का लोकार्पण करेंगे। हालांकि इस बीच बजट के अभाव में लटके सैफई के चार बड़े प्रोजेक्टों और 300 बेड के गायनी अस्पताल को भी रफ्तार मिलने की उम्मीद है।
2014 में सैफई मेडिकल कॉलेज में 500 बेड का सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल बनवाने के लिए स्वीकृति मिली थी। 2015 में इसका भूमिपूजन करके काम भी शुरू करा दिया गया था। बजट के अभाव में अस्पताल का काम बीच में धीमा हो गया। इसके बाद शासन ने इसकी सुध ली और एक साल से काम तेजी से चल रहा था।
लोकसभा चुनाव से पहले बुधवार सुबह इसका लोकार्पण मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करेंगे। सुबह 11:30 पर राजकीय वायुयान से मुख्यमंत्री सैफई हवाई पट्टी पर पहुंचेंगे। 11:45 पर मुख्यमंत्री सैफई मेडिकल कॉलेज के नवनिर्मित 500 बेड के अस्पताल पहुंचकर शुभारंभ करेंगे। एक बजे वह लखनऊ के लिए रवाना हो जाएंगे। ऐसी उम्मीद है कि कार्यक्रम के दौरान सैफई के अधूरे पड़े अन्य प्रोजेक्टों को शुरू करने के लिए सीएम दिशा-निदेेश दे सकते हैं।
यह प्रोजेक्ट हैं अधूरे
1- 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने 300 बेड के गायनी अस्पताल को स्वीकृति देकर निर्माण कार्य शुरू कराया था। तब इसकी लागत 176.77 करोड़ आंकी गई थी। सात सालों में चार बार में अभी तक निर्माण के लिए सिर्फ 76 करोड़ ही मिल सके हैं। ऐसे में निर्माण कार्य धीमी गति से चल पा रहा है। यही वजह है कि सात सालों में निर्माण की लागत लगभग 103.23 करोड़ रुपये बढ़ गई है। अब ऐसे में जहां पहले ही 100 करोड़ रुपये की जरूरत थी। वहीं, अब करीब 200 करोड़ और चाहिए होंगे।
2- साल 2012 में सैफई अर्बन डेवलपमेंट प्रोजेक्ट बना था। इसके तहत 170.96 करोड़ की परियोजना से पूरे गांव में सीवर लाइनें बिछाई जानी थीं। पेयजल के लिए नई लाइनों का जाल बिछाया जाना था। अंडर ग्राउंड बिजली की लाइनें डाली जानी थीं। सड़कों का नए सिरे से निर्माण कराया जाना था। साइकिल ट्रैक का भी निर्माण किया जाना था। इनमें से दो ओवरहेड टैंक बनाए जाने थे। 70 करोड़ की लागत से 24 फीसदी काम भी हो गया था, लेकिन उसके बाद 2017 में सरकार बदल गई और अन्य काम अधर में लटक गए।
3- इटावा जिले को पर्यटन के नक्शे पर उभारने के उद्देश्य से पर्यटन कांप्लेक्स बनवाने का निर्णय लिया गया था। इस कांप्लेक्स के लिए 20 करोड़ रुपये जारी किए गए थे। इससे भवन बना है, लेकिन उसकी साज-सज्जा नहीं हो सकी है। अक्तूूबर 2016 में पुनरीक्षित आकलन पर 42 करोड़ 93 लाख रुपये का शासन को प्रस्ताव गया था, जिस पर शासन ने 20 करोड़ रुपये दे भी दिए थे। इससे इमारत बन गई, लेकिन अन्य काम रुके हुए हैं।
4- 2016 में ही 41 करोड़ 88 लाख रुपये की लागत से मल्टी लेवल पार्किंग कांप्लेक्स बनाने के लिए मंजूरी मिली थी। इसमें 600 गाड़ियां रुकने का प्रोजेक्ट तैयार हुआ था। 16 करोड़ 75 लाख रुपये दे दिए थे। हालांकि, इसके बाद इसे भी फंड नहीं मिल सका। हालांकि इस वजह से यह प्रोजेक्ट भी लगभग सात साल से अटका हुआ है।