इटावा। संयुक्त जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर मरीजों के साथ लापरवाही की जा रही है। जिला अस्पताल की इमरजेंसी में दिसंबर 2025 में एक्सपायर्ड हो चुके दो जीवन रक्षक इंजेक्शन शुक्रवार को मिले थे। ये इंजेक्शन इमरजेंसी में बीते नौ दिनों से रखे थे। इन नौ दिनों में ये इंजेक्शन किस-किसको लगाए गए हैं, अब अस्पताल प्रशासन इसकी जांच कराएगा।
बता दें कि जिला अस्पताल की इमरजेंसी में एट्रोपिन व एडरोप्रो के सात एक्सपायर्ड इंजेक्शन मिले थे। इन इंजेक्शनों पर एक्सपायर्ड की तिथि दिसंबर 2025 पड़ी थी। जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉक्टर अजय शर्मा ने बताया कि एट्रोपिन इंजेक्शन हार्ट रोगियों को दिया जाता है। यह इंजेक्शन सीपीआर देते समय दिया जाता है। इससे हार्टरेट बढ़ाने में मदद मिलती है। वहीं, दूसरा एडरोप्रो इंजेक्शन बीपी न आने पर तत्काल दिया जाता है। इसके लगने के बाद मरीजों को तुरंत आराम मिलता है।
डॉक्टर का मानना है कि एक्सपायर इंजेक्शन व दवा का प्रभाव कम हो जाता है। अगर हार्टरोगी के दिकक्त होने पर यह इंजेक्शन लगाया जाता है उसको फायदा नहीं मिलेगा। ज्यादा दिक्कत होने पर मरीज की जान भी जा सकती है।
शनिवार को डॉ. एस आलम ने इमरजेंसी ड्यूटी पर तैनात डॉ. राघवेंद्र सिंह व फार्मासिस्ट शरद तिवारी से पूछताछ की। इस दौरान कर्मचारियों ने कहा कि एक्सपायर्ड इंजेक्शन किसी को नहीं लगाए गए हैं। डॉ. एस आलम ने डॉक्टर व फार्मासिस्ट के टेबल पर रखे अन्य इंजेक्शन को काउंटर के अंदर रखने के निर्देश दिए।