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अकीदतमंदों ने रो-रोकर मांगीं दुआएं

Sun, 15 Mar 2015 12:07 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, इटावा
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हजरत इमाम हुसैन अलै की छब्बीसवीं पीढ़ी में जन्में सूफी संत हजरत हाजी हाफिज सैय्यद वारिस अली के कटरा शाहाब खां स्थित दरगाह वारसी में उर्स पर उनके शिष्य हजरत अबुल हसन शाह वारसी का कुल शरीफ हुआ जिसमें आपके हजारों चाहने वालों ने शिरकत कर रो-रोकर दुआएं मांगीं। कुल से पूर्व अकीदतमंदों ने शानदार महफि ले शमा सजाई और कव्वाली का दौर चलता रहा।
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तीन रोजा उर्स के मौके पर रात्रि को कुल से पूर्व महफिल में मुंबई के कव्वाल अली वारिस एंड पार्टी, बरेली के फैजान जीशान और मुरादाबाद के असलम वारसी ने ऐसा समां बांधा कि लोगों की आंखें नम हो गईं और दरगाह वारसी या वारिस हक वारिस की सदाओं से गूंज उठी।

कव्वाल अली वारिस ने कुछ इस तरह कहा ‘‘मैं तेरे करम से शाजी मियां दुनिया में नवाजा जाता हूँ, है नाज मुकद्दर पर अपने मैं तेरा गदा कहलाता हूँ’’, ‘मेरे यार तू सलामत तेरे दम से हर खुशी, मैं हजार बार कुर्बां तू ही मेरी जिन्दगी।’’ आदि कलाम पेश कर खूब वाह-वाही लूटी।
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रात्रि एक बजे कुल शरीफ  के बाद कोलकाता के तेवरेज वारसी ने अपनी बेहतरीन आवाज से सलाम पेश किया। उसके बाद दरगाह शरीफ  के आनरेरी सदर हाजी अहमद अली वारसी ने रो-रोकर देश में अमनोअमान और सभी के वास्ते हाथ उठाकर दुआ की।

बाद कुल हजरत अबुल हसन शाह वारसी रह0 के मजार शरीफ पर सदर, आनरेरी सेक्रेटरी हसन जलीस वारसी, हाजी बुलाकी वारसी आदि ने चादर पेश कर दुआएं मांगीं। उसके बाद रंग बिरंगी आतिशबाजी भी चलाई गई और एक दूसरे को सभी ने मुबारकबाद पेश की।
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